अब चल बाजार एप से मिलेगी किसानों को उत्पादों की मनमाफिक कीमत

अब चल बाजार एप से मिलेगी किसानों को उत्पादों की मनमाफिक कीमत

कुमार गौरव/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:  जिले के वैसे किसान जो अपनी फसलों को बेचने के लिए मंडी तक नहीं जा पाने के कारण नुकसान में रहते हैं और पंचायतों में ही औने पौने कीमत पर अपने उत्पादों को बेचते हैं। उनके लिए खुशखबरी है। अब उन्हें गांव में एक ऐसी सुविधा मिलने जा रही है जिसके उन्हें न सिर्फ बेहतर प्लेटफॉर्म मिलेंगे बल्कि वे अपने उत्पादों को मनमाफिक कीमत पर बेच भी सकेंगे। कुछ ऐसा ही प्रयोग किया जिले के दो उद्यमी संतोष नायक व अविशेष सिंह ने। इन दोनों ने संयुक्त प्रयास से चल बाजार एप…तैयार किया है। जिसके माध्यम से न सिर्फ किसानों को सभी उत्पादों की सही कीमत मिलेगी बल्कि उन्हें ऑनलाइन ग्राहक भी नसीब होंगे। बस इसके लिए उन्हें ऑनलाइन व इस एप को डायनलोड करना पड़ेगा। इसके लिए कवायद पूरी की जा चुकी है और अबतक जिले के करीब 30 किसानों को इस एप से जोड़ा जा चुका है। वे इस एप के माध्यम से अपने उत्पादों व उनकी कीमत को अपलोड कर रहे हैं और ग्राहक ऑनलाइन सारी जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक देश की जनसंख्या की 35 फीसदी आबादी इंटरनेट का इस्तेमाल कर रही है जिसमें शहरी क्षेत्रों में 71 फीसदी तो ग्रामीण क्षेत्रों में 93 फीसदी की बढ़त लगातार हो रही है। वहीं ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों की तादाद भी 30 फीसदी के साथ बढ़ रही है। ई-कॉमर्स शॉपिंग व ऑनलाइन रिटेल मार्केटिंग का पूरा बाजार देश में 4.8 फीसदी है।

अनाज से लेकर मशरूम तक मिलेंगे ऑनलाइन
चल बाजार एप…के माध्यम से अब अनाज से लेकर मशरूम, फल व सब्जी ऑनलाइन लोकल स्तर पर उपलब्ध होंगे। इस संबंध में संतोष नायक ( चल बाजार एप लांचर सह क्रू मेंबर) व अविशेष सिंह (क्रू मेंबर, चल बाजार एप) बताते हैं कि उन्होंने किसानों के हित के लिए इस एप को तैयार कराया है। ताकि जिले के किसान व उपभोक्ताओं को बिचौलियों से मुक्ति मिल सके और उचित कीमत पर अनाज से लेकर अन्य खाद्य पदार्थ मिल सके। उन्होंने बताया कि इस एप के माध्यम से फ्रेश फिश, डेयरी, आईसक्रिम, फ्रोजेन फूड, ताजी सब्जियों की खरीदारी की जा सकती है।

क्यों है बेहतर विकल्प
आमतौर पर लोग लोकल स्तर पर जो मार्केटिंग करते हैं उसमें मोल भाव या फिर ऊंची कीमत पर सामान लेने की मजबूरी होती है। यहां बता दें कि आज भी देश के टियर टू व थ्री शहरों में ऑनलाइन शॉपिंग का कांसेप्ट पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया है जबकि अमूमन सभी हाथों में स्मार्ट फोन जरूर दिखते हैं। वहीं रूरल क्रेडिट सर्वे रिपोर्ट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक देश के अधिकांश किसान अपने उत्पादों को वैसे समय व जगहों पर कम कीमत पर बेचने को मजबूर होते हैं जहां उन्हें मनमाफिक कीमत नहीं मिल पाती है। वहीं कोसी और सीमांचल की बात करें तो अधिकांश किसान लीज पर खेत लेकर खेती करते हैं और उन्हें इसके एवज में जमींदार को फसल की आधी कीमत भी देनी पड़ती है। यही कारण है कि एकीकृत बाजार के अभाव में उन्हें औने पौने दाम पर अपने उत्पाद को बेचना पड़ता है। खासकर, सूबे के सभी जिलों में मंडियों के अभाव में तो किसानों को अपने उत्पादों की सही कीमत तक नहीं मिल पाती है। लिहाजा, उन्हें परिश्रम के सापेक्ष में काफी घाटे का सौदा करना पड़ता है। बिचौलियों के कारण उन्हें 60 फीसदी तक का घाटा लगता है।

किस तरह फायदे में रहेंगे किसान
चल बाजार एप…के माध्यम से छोटे शहरों के किसान अपने उत्पादों की डिलीवरी अपने मुताबिक कर पाएंगे, इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव से दो चार नहीं होना पड़ेगा, लोकल किराना दुकानदारों की झिकझिक से मुक्ति मिलेगी, बेहतर व गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की श्रृंखला खरीदारों को ऑनलाइन देखने को मिलेगी, कीमत में प्रतियोगिता रहने के कारण किसान व खरीदार दोनों फायदे में रहेंगे, एप के माध्यम से उपभोक्ताओं से किसानों का होगा सीधा संपर्क, बिचौलियों से छुट्‌टी, उत्पाद को बेचने के लिए ऋण के लेन देन से मुक्ति, उत्पादों को बेचने के लिए पूरी तरह से किसानों को मिलेगी मनमाफिक कीमत, उपभोक्ताओं को उत्पाद सीधे किसानों से खरीदने का मौका मिलेगा, गुणवत्तापूर्ण सामान लेने के लिए मिलेंगे कई ऑप्शन, उत्पादों में मिलने वाली छूट पर रखी जा सकती है नजर, डिलीवरी के दौरान ही उत्पाद की कीमत वसूली जाएगी, पारदर्शी तरीके से उत्पादों की होगी खरीदारी।

‘अच्छी पहल है’
जिला कृषि पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद ने कहा जिले के दो युवाओं के द्वारा किसानों के हित में बनाए गए एप की जानकारी मिली है। यह कदम बेहद सराहनीय है। यदि इस एप से किसान फायदे में रहते हैं तो यही उनकी सफलता है।

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