पुर्णिया: अम्बेडकर के जन्म दिवस से पूर्व रक्तदान शिविर आयोजन

प्रियांशु आनंद/पुर्णिया
पुर्णिया/बिहार:  महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना एवं रेड रीवन क्लब के द्वारा डा॰ भीम राॅव अम्बेडकर के जन्म दिवस के पूर्व आयोजित किया गया तृतीय स्वैच्छिक रक्तदान शिविर इस रक्तदान शिविर कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के सह अधिष्ठाता-सह-प्राचार्य, डा॰ राजेश कुमार ने किया। सह अधिष्ठाता-सह-प्राचार्य, डा॰ राजेश कुमार एवं महाविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा रेड रीबन काटकर संयुक्त रूप से इस तृतीय स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का विधिवत शुभारम्भ किया। इस तृतीय स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में महाविद्यालय के छात्र/छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने उत्साह पूर्वक भाग लेकर कुल 26 युनिट रक्तदान किया।
इस अवसर पर प्राचार्य डा॰ राजेश कुमार ने अपने उद्वोधन में सर्वप्रथम अम्बेडकर के बारे में बताते हुए कहा कि आधुनिक भारत के प्रमुख विधि वैश्य, समाज सुधारक और राष्ट्रीय नेता थे। जिनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को महु, इन्दौर मध्य प्रदेश में हुआ था। अम्बेडकर का कथन था कि अपने देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आपस में समानता और भाई चारे के भाव के अपनाना होगा। उन्होंने रक्तदान शिविर पर चर्चा करते हुए सभी को बताया कि एक व्यक्ति के द्वारा रक्तदान करने पर तीन व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है। रक्त दान शिविर में प्रेरणा के लिए प्राचार्य महोदय ने सभी को रक्त दान के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान कि, जिसमें उन्होने बताया कि इस प्रकार प्राप्त किये गये रक्त का उपयोग सबसे अधिक सड़क हादसे में किया जाता है, क्योंकि भारत में प्रत्येक 3 मिनट में एक व्यक्ति की मृत्यु सड़क हादसे में हो रही है। जो देश में होने वाली किसी भी घटनाओं से अधिक है।
साथ ही साथ यह कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को वर्ष में एक बार रक्तदान जरूर करना चाहिए, क्योकि रक्तदान से शरीर में यदि आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जिसका संचय किडनी एवं लीवर में होने लगता है, जिसके कारण हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। बृद्धावस्था में अल्जाइमर एवं डिमेंशिया जैसे रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। कार्यक्रम प्रभारी राष्ट्रीय सेवा योजना एवं रेड रिवन क्लब के डा॰ पंकज कुमार यादव ने छात्र/छात्राओं को बताया की रक्तदान से स्ट्रोक का खतरा 33 प्रतिशत तक कम हो जाता है, इससे अस्थिमज्जा भी क्रियाशील रहती है और कैंसर का जोखिम भी कम रहता है।
रक्त की सर्वाधिक आवश्यकता एच॰आई॰बी॰ एड्स रोगियों को होती है, क्योंकि वर्तमान समय में आकड़ों पर ध्यान दे तो यह कहा जा सकता है कि विश्व का हर चैथा व्यक्ति भ्प्ट संक्रमित है। दूसरे स्थान पर रक्त की आवश्यकता सड़क हादसे में शिकार लोगों को होती है। इस प्रकार प्रत्येक 230 सकेण्ड में एक व्यक्ति की मौत देश में सड़क हादसे में हो रही है। इस प्रकार प्रतिदिन 400 लोगों की मौत देश में सड़क हादसे से हो रही है। भारत में प्रतिवर्ष एक करोड़ 20 लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, जबकि विभिन्न अधिकोशों में कुल 90 लाख यूनिट रक्त केवल एकत्रित हो पाता है। भारत में एक लाख से अधिक थैलसिमिया के मरीज जिसमें हमसभी यदि बात करें तो पूर्णियाँ में ही 70 से अधिक मरीज है जिन्हे प्रत्येक माह किसी न किसी रूप में रक्त की आवश्यकता पड़ती है।
भारत में प्रत्येक 1000 व्यक्ति में से 8 व्यक्ति ही स्वैच्छिक रूप से रक्तदान करते है। इस स्वैच्छिक रक्त दान शिविर का मुख्य उद्देश्य छात्रों एवं युवाओं में एड़्स के प्रति जागरूकता फैलाना एवं इस कार्य में आगे आने के लिए प्रोत्साहित करना है कि आज के युवा समाज के जरूरत मन्द लोगों की मदद करें क्योकि भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र हैं जिसकी 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष के उम्र से कम है। उन्होने यह भी बताया कि रक्तदान से हम सभी को अपने रक्त की जांच से पांच प्रमुख बिमारियों जैसे – हेपेटाईटिस, हेपेटाईटिस सी॰, सिकलिस, एच॰आई॰बी॰ और मलेरिया की भी जानकारी प्राप्त हो जाती है। डा॰ पंकज कुमार यादव ने यह भी बताया कि कृषि महाविद्यालय कृषि शिक्षा के साथ साथ छात्र/छात्राओं के नैतिक एवं समाजिक एवं व्यक्तित्व विकास हेतु लगातार विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है। इससे पूर्व महाविद्यालय में 22 अगस्त 2014 एवं 30 जुलाई 2016 को भी स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा चूका है।
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