पूर्णिया:कृषि महाविद्यालय में चल रहे प्रशि़क्षण में प्रशिक्षणर्थियों का निःशुल्क स्वास्थ्य जाॅंच शिविर

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया
पूर्णिया/बिहार:भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णिया के  आदेश पर चल रहे प्रशि़क्षण कार्यक्रम प्रशिक्षणर्थियों का निःशुल्क स्वास्थ्य जाॅंच शिविर में मधुमेह एवं रक्त चाॅप की जांच किंन्स डायबेटिक सेन्टर, पूर्णियाँ के सहयोग से कराया गया।

मुख्य समन्वयक मखाना वैज्ञानिक डा0 अनिल कुमार ने मखाना आधारित फसल  पद्धति से बिहार में जलीय खरपतवार से आच्छादित अनुपयुक्त एवं अनुत्पादक जलजमाव क्षेत्र जलीय खरपतवार से आच्छादित अनुपयुक्त एवं अनुत्पादक जलजमाव क्षेत्रों की उत्पादकता, लाभप्रदता में वृद्धि एवं टिकाऊ खेती के लिए अतिआवष्यक कार्यः इन क्षेत्रों की साफ-सफाई एवं जीर्नोद्धार करना, सोलर पम्प की व्यवस्था।

(क) जुलाई महीने में 1-2 फीट तक जलजमाव वाला क्षेत्र जो अक्टूबर में सुख जाता है। इन क्षेत्रों में किसान गरमा धान की खेती करते हैं, लेकिन इससे लाभ बहुत ही कम होता है। खेत पद्धति- मखाना आधारित टिकाऊ फसल पद्धति द्वारा मखाना उत्पादकों के जिवीकोपार्जन हेतु, सामाजिक एवं आर्थिक उन्नयन मखाना-सरसों फसल पद्धति से सबसे अधिक आय एवं  लागत अनुपात ( 3.5ः1), प्राप्त होता है, इसके बाद क्रमषः मखाना-सिंघाड़ा, मखाना- धान- मसूर, मखाना- धान- केराव फसल पद्धति से प्रप्त होता है। मखाना- बरसीम,मखाना- धान- मटर, मखाना- धान- मसूर, मखाना- धान- तीसी, मखाना- धान- खेसारी, मखाना- धान- चना ,मखाना- धान- बांकला, मखाना- धान- केराव

(ख) जुलाई महीने में 3-4 फीट तक जलजमाव वाला क्षेत्र जो जनवरी से फनवरी  में सुख जाता है। तालाब पद्धति- मखाना आधारित टिकाऊ फसल पद्धति मखाना- सिंघाड़ा

(ग) जुलाई महीने में 7-10 फीट तक जलजमाव वाला क्षेत्र जो सालों भर जलमग्न रहता है।  तालाब पद्धति- मखाना आधारित टिकाऊ फसल पद्धति  मखाना- सिंघाड़ा एवं मखाना-सह- मत्स्यपालन।

पांच दिवसीय प्रशि़क्षण कार्यक्रम के सह समन्वयक डाॅ0पंकज कुमार यादव  ने मखाना पौधशाला से मुख्य खेत में मखाना के पौधों की रोपाई की वैज्ञानि विधी को विस्तार पूर्वक बताया।

डा॰ पारस नाथ ने बताया कि मखाना फसल में कीट प्रबंधन: खेत पद्धति- मखाना पौध की रोपाई से पूर्व इमिडाक्लोरपिड70 ॅै अथवा थायोमेथोक्सैम 70 ॅै 5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर उसके जड़ को आधा घंटा तक उस घोल मे डुबोकर षोधित करना चाहिए तथा मखाना पौध की रोपाई के40 दिनों बाद 5 प्रतिषत नीम तेल का घोल 25 दिनों के अन्तराल पड़ छिड़काव करना  चाहिए ।तालाब पद्धति – मखाना पौध की रोपाई के 40 दिनों बाद 5 प्रतिषत नीम तेल का घोल 25 दिनों के अन्तराल पड़ छिड़काव करना चाहिए ।

दरभंगा के किसान श्रीमती शिव कुमारी देव, श्री राहुल कुमार सहनी, राम मूर्ति रमण, सोहन कुमार दास, मुकेश कुमार ठाकुर, राजन कुमार झा, विनोद राम, प्रभात कुमार राम,विमल सहनी, मोहन सहनी, राजू सहनी, गोविन्द सहनी, उपेन्द्र कुमार यादव, संतोष यादव एवं पप्पू सहनी आदि मखाना कृषकों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर महाविद्यालय के अन्य वैज्ञानिक  डा॰ पारस नाथ आदि ने अपना सहयोग प्रदान किया। छात्र/छात्राओं आदि का सक्रिय सहयोग रहा। कार्यक्रम  का संचालन मुख्य समन्वयक मखाना वैज्ञानिक डा0 अनिल कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन सह समन्वयक डाॅ0 पंकज कुमार यादव द्वारा किया गया।

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