पुर्णिया: स्वच्छ भारत अभियान के तहत सौ घंटे स्वच्छता के नाम कार्यक्रम का आयोजन

प्रियांशु आनंद/पुर्णिया
पुर्णिया/बिहार:  राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की देखरेख में  मध्य विद्यालय, भूना, जोकीहाट की 35 छात्राओं एवं 15 छात्रों के साथ 5 शिक्षकों एवं उत्क्रमित मध्य विद्यालय हिंगवा, भरगामा के 25 छात्राओं एवं 18 छात्रों के साथ 6 शिक्षकों ने भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णिया में एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण कर कृषि तकनीकी ज्ञान प्राप्त किया। इस अवसर पर प्राचार्य डाॅ. राजेश कुमार ने इस अवसर पर स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामिण) एक जन आन्दोलन के अन्तर्गत स्वच्छ भारत समर इन्टर्नशीप की सौ घंटे स्वच्छता के विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी गयी तथा सभी को इस आन्दोलन में अपनी भूमिका निर्वहन् करने का निर्देश दिया।

उन्होंने बताया कि स्वच्छता आज पूरे देश में एक जनआन्दोलन का रुप ले चुका है। हम सभी को स्वस्थ रहना है तो स्वच्छता को आत्मसात करना होगा। इसके लिए भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा छात्र-छात्राओं की सहभागिता हेतु स्वच्छ भारत समर इन्टर्नशिप की सौ घंटे स्वच्छता के विभिन्न कार्यक्रमों का प्रारुप के साथ ग्रामिण क्षेत्रों में कार्य करने पर विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन की शुरुआत की।

इस अवसर पर उपस्थित सभी छात्र और छात्राओं को उन्होंने बताया की कृषि महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2010 में बिहार की तीन बार मुख्य मंत्री रहे भोला पासवान शास्त्री जी के नाम पर वर्तमान मुख्य मंत्री श्री नितीश कुमार द्वारा किया गया। कृषि विषय पर चर्चा करते हुए अपने सम्बोधन में प्राचार्य ने बताया की हम सभी को स्वस्थ्य रहने के लिए सन्तुलित एवं पोषण युक्त आहार की आवश्यकता पड़ती है, हम अपने प्रतिदिन पोषण आवश्यकता की पूर्ती हेतु संतुलित आहार पर निर्भर रहते है, जिसमें प्रमुख रूप से प्रोटीन, वसा, कार्बोहाड्रेट, विटामिन, खनिज लवण एवं पानी की प्रयाप्त मात्रा आदि।

लेकिन हम लोग स्वाद पर अधिक ध्यान देते हैं,  जबकि हम सभी को पोषण पर ध्यान देना चाहिए। आज बाजार में विभिन्न प्रकार के मिलावट खाद्य पदार्थों में पायी जा रही है। यही कारण है कि हमारे यहां खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों का अवशेष 20 प्रतिशत से अधिक है जबकि विश्व स्तर पर इसकी मात्रा महज 2 प्रतिशत है। आज एक तरह से मिट्टी, पानी, खाद्य पदार्थ, तेल, फल एवं सब्जी सभी मिलावटी हो चुके है।

कुछ ऐसे कीटनाषक जो हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार की बिमारीयां पैदा करते हैं जैसे ऐल्ड्रिन के प्रयोग से सिर दर्द, सुस्ती और उल्टी जैसी शिकायते हो सकती है। जबकि हेप्टाक्लोर से लीवर की खराबी के साथ-साथ प्रजनन क्षमता पर भी हानिकारक प्रभाव परता है। एंटी-बायोटिक दबाईयों से मुर्गे जरूर सेहतमंद हो रहे है, लेकिन यह दवाईयां चिकन के साथ महारे आपके पेट में पहुंच जाती है।

हम सभी अलग से एंटी-बायोटिक लेते हैं तो उसका प्रभाव शरीर तक नहीं पहुंचता है। उन्होंने महाविद्यालय में शिक्षा, के अतिरिक्त शोध, प्रसार एवं प्रशिक्षण का कार्य चलता रहता है, इसके साथ साथ कृषि अध्यनरत छात्र/छात्राओं के व्यक्तित्व विकास हेतु विभिन्न गतिविधियां महाविद्यालय के अन्य इकाईयों द्वारा आयोजित की जाती रहती है। बिहार में कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2010 में बिहार सरकार द्वारा बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर, भागलपुर की स्थापना के साथ-साथ विभिन्न  महाविद्यालयों की भी स्थापना की गयी है।

बिहार सरकार द्वारा प्रत्येक महाविद्यालयों में कृषि विधा से 10 +2 उतीर्ण छात्र/छात्राओं के प्रवेष हेतु 50 प्रतिषत स्थान आरक्षित किया गया है, तथा अन्य 50 प्रतिशत स्थान हेतु गणित एवं विज्ञान के छात्रों के प्रवेश के लिए आरक्षित है। साथ ही साथ कृषि शिक्षा को बढावा देने के लिए वर्तमान सरकार द्वारा कृषि स्नातक शिक्षा अध्यनरत छात्र/छात्राओं को प्रतिमाह 2000 हजार रूपया छात्रवृति एवं 6000 रू॰ वार्षिक रूप से किताब आदि खरीदने हेतु प्रदान किया जाता है। कृषि की पढ़ाई में अपना भविष्य सुरक्षित कर सकते हैे क्योंकि सरकार द्वारा कृषि की पढाई हेतु आर्थिक मदत प्रदान की जा रही है।

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