पूर्णिया:स्वच्छ भारत समर इन्टर्नशिप के तहत गाजर  घास का उन्मुलन कार्यक्रम आयोजित

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया
पूर्णिया/बिहार:महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना ईकाइ के प्रभारी डा॰ पंकज कुमार यादव की देख रेख में स्वच्छ भारत समर इन्टर्नशिप कार्यक्रम अन्तर्गत सौ घंटे स्वच्छता हेतु कृषि स्नातक के छात्रों के द्वारा गाजर (पार्थेनियम)  घास का उन्मुलन  के कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के सह-अधिष्ठाता सह प्राचार्य डा0 राजेश कुमार ने किया। इस अवसर पर प्राचार्य द्वारा छात्र/छात्राओं को गाजर (पार्थेनियम)  घास से होने वाली परेशानियों के बारे में बताया साथ ही साथ कृषि छात्रों/छात्राओं को यह बताया कि इसकी शुरूआत एलर्जी से होता है, इसका प्रमुख कारण जिस परिवेश एवं वातावरण में हमलोग निवास करते हैं, वहाँ साफ सफाई का न होना प्रमुख है।

प्राचार्य ने ग्रामीण क्षेत्रों में अस्थमा के प्रमुख कारण में यह बताया कि पार्थेनियम घास जिसे गाजर घास, काग्रेस घास सफेद टोपी, चंटक चादनी एवं गनीबूटी आदि नामों से जाना जाता है, यह ग्रामीण  क्षेत्र में अस्थमा का प्रमुख कारण है। इस गाजर घास की उत्पत्ति उत्तरी अमेरिका से हुई। भारत में इस घास का प्रवेश वर्ष 1955 में महाराष्ट्र द्वारा अमेरिका से गेहूँ का आयात किया गया था, उसी के साथ इस घास का बीज भारत मेें आया।

वर्तमान समय में हमारे पास के वातावरण सड़क, रोड, रेललाइन, नहरों के किनारें, एवं गली मुहल्ले हर स्थान परपार्थेनियम घास को आसानी से देखा जा सकता है। यदि आकड़ों पर ध्यान दे तो भारत के करीब 35 मिलियन हेक्टेयर जमीन पर गाजर घास का आच्छादन होे गया है। गाजर घास का एक पौधा अपने जीवन चक्र 3-4 महीने में करीब 10,000 से 25,000 बीज का उत्पादन करता है। सामान्य रूप से इस पौधे में 6-55 पत्तियाँ पायी जाती है, इसके बीज का जीवन काल औसत 20 वर्ष तक होता है।

गाजर घास आज किसी न किसी प्रकार से कृषि उत्पादन को40 प्रतिशत तक हानि पहूँचता है। इसके द्वारा होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए प्रचार्य ने राष्ट्रीय सेवा योजना (एन एस एस ) के प्रभारी डा0 पंकज कुमार यादव को निर्देशित किया कि राष्ट्रीय सेवा योजना स्वंय सेवकों से स्वच्छ भारत समर इन्टर्नशिप कार्यक्रम अन्तर्गत सौ घंटे स्वच्छता अन्र्तगत श्रमदान करा कर इस घास का उन्मूलन महाविद्यालय से करके पूरी तरह समाप्त किया जाए। इस कार्य के लिए आज इसकी शुरूआत की गयी इस अवसर पर सभी छात्र/छात्रायें, उत्साहपूर्वक गाजर (पार्थेनियम)  घास का उन्मुलन में अपना योगदान प्रदान किये। क्योंकि गाजर घास का यांत्रिक उन्मूलन ही इसे समाप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका है। महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के प्रभारी के साथ स्वच्छ भारत समर इन्टर्नशिप कार्यक्रम में स्नातक प्रथम वर्ष के राष्ट्रीय सेवा योजना स्वयं सेवक सुमित कुमार अग्रवाल, विवेक कुमार, रीशू कुमार, शिव शंकर, रोशन, कुमार, सुधीर कुमार, विनोद कुमार, सोनू कुमार, प्रवीण कुमार एवं शशी भूषण तथा दूसरे समूह में, राहुल राय, मयंक कुमार, नीतीश गौरव, संग्राम साहा, योगेश, अभिजीत, आयुष, दीपक, अंकित राज, सलीम मलिक सिद्धीकी, विनोद कुमार पुरुषोत्तम कुमार सिंह, नरोत्तम कुमार एव ंनीलाभ कुमार सिंह  इत्यादि लगातार स्वछता का कार्य कर रहे  है। गाजर (पार्थेनियम) घास का उन्मुलन  के कार्यक्रम में महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक डा॰ पारस नाथ, डा॰ जे॰ प्रसाद, डा॰ पंकज कुमार यादव, डा॰ अनिल कुमार, डाॅ0 तपन गोराई, श्री जय प्रकाश प्रसाद, श्री मोहन सिन्हा के साथ-साथ अन्य वैज्ञानिक एवं कर्मचारियों ने अपना सहयोग प्रदान किया।

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