कृषि महाविद्यालय स्वयं सेवकों द्वारा पूरा 80 घंटे का कार्य, 20 घंटे के कार्य में नुक्कड़ नाटक जागरूकता अभियान

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया
पूर्णिया/बिहार: स्वच्छ भारत समर इंटर्नशिप अंतर्गत कृषि महाविद्यालय के छात्रों के समूह ने 80 घंटे कार्य किया। बाकी बचे 20 घंटे का कार्य 31 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। रविवार को स्वच्छ भारत समर इंटर्नशिप अंतर्गत महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के प्रभारी डाॅ पंकज कुमार यादव की देखरेख में महाविद्यालय के छा़़़त्रों के दल का समूह पोपुरिया गांव गया व स्वच्छता के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया।

01 मई से 31 जुलाई तक चलने वाले स्वच्छ भारत समर इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत 100 घंटे स्वच्छता कार्य के लिए कृषि महाविद्यालय के स्नातक प्रथम वर्ष के छात्र लगातार महाविद्यालय के पास के पोठियाबाद एवं पोपुरिया गांव के ग्रामीण नागरिकों को स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी प्रदान कर रहे हैं।

पोठियाबाद पोपुरिया गांव का चयन महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना ईकाई द्वारा स्वच्छ भारत समर इंटर्नशिप के लिए किया गया है। जिसमें स्नातक प्रथम वर्ष के राष्ट्रीय सेवा योजना स्वयं सेवक सुमित कुमार अग्रवाल, विवेक कुमार, रिशु कुमार, शिवशंकर, रोशन कुमार, सुधीर कुमार, विनोद कुमार, सोनू कुमार, प्रवीण कुमार एवं शशिभूषण लगातार स्वच्छता का कार्य कर अभी तक करीब 80 घंटे का कार्य पूरा कर चुके हैं। जिसमें प्रमुख रूप से शौचालय निर्माण व उसके उपयोग, हाथ की साफ सफाई, प्लास्टिक का कम से कम प्रयोग, कृषि अवशेष को सड़ाना न कि जलाना आदि। बचे हुए 20 घंटे के कार्यक्रम में विशेष रूप से डोर टू डोर जाकर स्वच्छता एवं स्वास्थ्य, स्वच्छता मेला, नुक्कड़ नाटक, विद्यालय छात्रों को प्रेरित करना दिवाल की पेंटिंग के लिए स्वच्छता नारा एवं व्यवहार परिवर्तन के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है।

इस अवसर पर ग्रामीणों के द्वारा स्वच्छता कार्य में पूरा सहयोग प्रदान किया जा रहा है। प्लास्टिक के बारे में ग्रामीणों को बताया गया कि इसका प्रयोग आप न करें। इसके स्थान पर जूट के बैग व कपड़ों से बने थैले का प्रयोग करें। ग्रामीणों को यह बताया गया कि कृषि अवशेष को कम्पोस्ट का गड्ढा बनाकर करीब 45 दिनों तक गोबर के साथ सड़ने दें। इसके बाद ही इसका प्रयोग खाद के रूप में फसलों पर करें। पोपुरिया गांव के ग्रामीणों के शौचालय की उपलब्धता के बारे में जांच करने पर जानकारी मिली कि 95 प्रतिशत लोग खुले में ही शौच को जाते हैं।

बचे हुए लोग शौचालय बनवाने के लिए सरकारी अनुदान का इंतजार कर रहे हैं। इस मौके पर महाविद्यालय के अन्य वैज्ञानिक डाॅ पारसनाथ, डाॅ पंकज कुमार यादव एवं डाॅ अनिल कुमार की उपस्थिति रही।

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