पूर्णिया:वन महोत्सव सप्ताह का आयोजन के साथ महाविद्यालय में लगाए जाएगें विभिन्न प्रजातियों के पौधे

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया
पूर्णिया/बिहार:महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना ईकाइ के प्रभारी डा पंकज कुमार यादव की देख रेख में उत्क्रमित मध्य विद्यालय, परसा, कामीपुर, प्रखण्ड प्राणपुर, कटिहार  कें60 छात्र/ छात्राओं  के साथ 8 शिक्षकों ने भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णिया में एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण कर कृषि तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने के साथ साथ महाविद्यालय द्वारा आयोजित किये जा रहे वन महोत्सव सप्ताह में भी हुए सम्मिलित।

इस कार्यक्रम  की अध्यक्षता प्राचार्य डाॅ राजेश कुमार ने किया। इस अवसर पर प्राचार्य डाॅ राजेश कुमार ने छात्र/छात्राओं को वन महोत्सव सप्ताह एवं स्वच्छ भारत समर इन्टर्नशिप कार्यक्रम के बारे में भी बताया तथा महाविद्यालय के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2010 में बिहार की तीन बार मुख्य मंत्री रहे भोला पासवान शास्त्री जी के नाम पर वर्तमान मुख्य मंत्री श्री नितीश कुमार द्वारा किया गया।

प्राचार्य ने बताया कि भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह प्राकृतिक वातावरण जिनमें वनों, झीलों, नदियों और वन्य जीव जैसी प्राकृतिक सम्पदा सम्मिलित हैं का संरक्षण करें और जीवित प्राणियों के लिए मन में करुणा का भाव रखें। भारत में वर्ष 1980 में देश में स्वस्थ पर्यावरण के विकास के लिए पर्यावरण विभाग की स्थापना हुइ थी जो वर्ष 1985 में पर्यावरण और वन मंत्रालय का रुप ले लिया। इस मंत्रालय का मुख्य कार्य पर्यावरण सम्बन्धि कानूनों और नीतियों का संचालन व लागू करना है।

भोपाल गैस दुर्घटना के पश्चात पहली बार पर्यावरण संरक्षण कानून वर्ष 1986 में बन कर आया। भारत में पहली बार चिपको आन्दोलन की शुरुआत तत्कालीन उत्तर प्रदेश के चमोली नामक स्थान पर वर्ष 1973में प्रारम्भ हुआ, इसके प्रणेता श्री सुन्दर लाल बहुगुणा थे। इस आन्दोलन में महिलाओं मुख्य भूमिका थी, महिलाओं ने यह नारा लगाया था कि प्राण जाय पर वृक्ष न जाए और जंगल हमारा मायका है, हम इसे कटने नहीं देंगे। इसके साथ ही सारी महिलाएँ पौधों को पकड़कर चिपक जाती थी एवं वनों की सुरक्षा करती थी इसलिए इस आन्दोलन का नाम चिपको आन्दोलन पड़ा।

भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णिया में वर्ष 2016 में वन विभाग पूर्णियाँ के सहयोग से वन महोत्सव सप्ताह का आयोजन किया गया था जिसमें विभिन्न प्रजातियों के 200 से अधिक पौधे लगायेे गये थे। उन्होने उन्होने बताया कि वर्तमान समय में भारत में कुल 73 कृषि विश्वविद्यालयों में कृषि शिक्षा, के अतिरिक्त शोध, प्रसार एवं प्रशिक्षण का कार्य सतत चल रहा है।

इस अवसर पर महाविद्यालय के अन्य वैज्ञानिकों डा॰ पंकज कुमार यादव, श्री एस॰ पी॰ सिन्हा एवं डा॰ अनिल कुमार द्वारा छात्र/छात्राओं के व्यक्तित्व विकास हेतु चलायी जाने वाली विभन्न इकाईयों के बारे में जानकारी प्रदान की गयी। साथ ही साथ कृषि शिक्षा में प्रवेश प्रक्रिया के बारे में भी छात्र/छात्राओं अवगत हुए।

इस अवसर पर प्राचार्य डा॰ राजेश कुमार ने उत्क्रमित मध्य विद्यालय, परसा, कामीपुर, प्रखण्ड प्राणपुर, कटिहार  के साथ साथ स्नातक कृषि प्रथम वर्ष के छात्र/छात्राओं को वृक्षारोपण की भी शपथ दिलायी। उत्क्रमित मध्य विद्यालय, परसा, कामीपुर, प्रखण्ड प्राणपुर, कटिहार  कें 60 छात्र/ छात्राओं  में क्रमशः पल्लवी, मुस्कान, नेहा, निशा एवं अरविन्द, करण, शिवम, विक्की, रितिक,  आदि के साथ प्रधानाध्यापक अरुण कुमार दास एवं अन्य शिक्षक कुमारी श्वेता  एवं सज्जन कुमार आदि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर महाविद्यालय के अन्य वैज्ञानिक डा॰ जे॰ एन॰ श्रीवास्तव, डा॰ जनार्दन प्रसाद डा॰ पंकज कुमार यादव, श्री एस॰ पी॰ सिन्हा, डा॰ अनिल कुमार, डा॰  श्याम बाबु साह, डा॰ रवि केसरी, डाॅ0 रुबि साहा, डाॅ0 तपन गोराई, श्री जय प्रकाश प्रसाद एवं कर्मचारियों आदि ने शैक्षणिक भ्रमण में सक्रिय  सहयोग प्रदान कर कृषि सम्बन्घित जानकारी देने का कार्य किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र/छात्राआंे में मुख्य रूप से सोनी कुमारी, जय श्री राज, श्रृजल सुमन, एवं छात्रों में विवेक कुमार, पुरुषोत्तम,शशी भूषण, रीशू कुमार,  रिाजकिशोर, शिव शंकर, संदिप, अभिजीत, आयुश, विवेक, दीपक, रोशन, कुमार आशीष, विनोद कुमार, राहुल कुमार, निलाभ सिंह एवं  आदि ने उत्साह पूर्वक सहयोग प्रदान किया। इस कार्यक्रम  का संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय सेवा योजना ईकाई के पदाधिकारी डा॰ पंकज कुमार यादव द्वारा किया गया।

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