सुशासन बन गया श्मशान और ICU में हुआ TRP के लिए नंगा नाच

पटना:  बिहार की राजधानी पटना से महज 70 किलोमीटर दूर है मुजफ्फरपुर। जिस पटना में सुशासन बाबू यानि बिहार के सीएम नीतीश कुमार का बसेरा है उसी पटना से 70 किलोमीटर दूर मुजफ्फरपुर में सुशासन श्मशान में बदल गया है। ये हालात एक या दो दिनों में नहीं हुए हैं बल्कि पिछले 22 दिनों से मुजफ्फरपुर में मासूम मर रहे हैं उनके मां-बाप चीख चिल्ला रहे हैं लेकिन बिहार के सीएम समेत किसी भी मंत्री तक वो चीख नहीं पहुंची।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार पटना-दिल्ली दौड़ लगा रहे हैं लेकिन मुजफ्फरपुर के लिए नहीं बल्कि अपनी सियासत चमकाने के लिए और मुजफ्फरपुर के सवाल पर खामोशी से बचकर निकल जाते हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को मुजफ्फरपुर के मासूमों से ज्यादा भारत-पाकिस्तान क्रिकेट के स्कोर की चिंता है। डिप्टी सीएम सुशील मोदी खुद को इस लायक नहीं मानते की वो मुजफ्फरपुर पर कुछ बोल सकें। अगर बात करें दिल्ली की तो पीएम मोदी का ट्वीटर अकाउंट भी मुजफ्फरपुर पर खाली है अबतक।

इस अहंकारी राजनीतिक जमात को मुजफ्फरपुर पर अपनी चुप्पी तोड़ने के लिए विवश किया जा सकता था अगर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानि पत्रकार बिरादरी जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभाती। यहां पर ये साफ कर देना उचित है कि यहां पर केवल उन पत्रकारों को गैरजिम्मेदार बताया जा रहा है जो अपनी जिम्मेदारी और मर्यादा को भूलकर आईसीयू के भीतर अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए पहुंच गए।

मुजफ्फरपुर में दो दिन पहले दिल्ली के कुछ पत्रकारों ने टीआरपी के नाम पर जो घिनौना काम किया है उसने पत्रकारिता को शर्मिंदा कर दिया। दिल्ली से एयर कंडीशंड गाड़ी में बैठकर मुजफ्फरपुर पहुंचे इन पत्रकारों ने जो घटिया प्रदर्शन किया उसे कुछ शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।

पहले तो ये पत्रकार बिना किसी नियम की परवाह किये आईसीयू में प्रवेश करते हैं। इन्हें शायद ये भी पता नहीं कि आईसीयू में जाने के कुछ नियम व शर्तें होती हैं। या अगर पता होगा भी तो इस तरह से उछल कूद करते आईसीयू में प्रवेश करना ये अपनी शान समझते होंगे। वहां पहुंचकर बच्चों का इलाज कर रहे डॉक्टर पर हमलावर होकर उल्टे सीधे सवाल करना, अस्पताल में डॉक्टरों की कमीं पर सवाल करना, बदइंतजामी पर सवाल करना और इस तरह से करना जैसे कि सामने कोई प्रतिष्ठित डॉक्टर नहीं बल्कि कोई चोर उचक्का खड़ा हो।

जिस दिन ये पत्रकार टीआरपी के लिए आईसीयू में उद्दंडता का ये नंगा नाच कर रहे थे उसी दिन बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी मुजफ्फरपुर के उसी अस्पताल में पहुंचे थे। लेकिन इनमें से किसी की इतनी हिम्मत नहीं हुई की कोई सीएम से ये सवाल कर सके कि 140 बच्चों की मौत क्यों हुई, अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर की तैनाती क्यों नहीं की गई, क्यों सरकार मासूमों की मौत पर खामोश रही। इनमें से किसी पत्रकार ने वो कलेवर नहीं दिखाया।

दरअसल अस्पताल में बच्चों का इलाज कर रहे डॉक्टर इनके लिए सॉफ्ट टार्गेट थे। जिनके सामने ये अपनी आक्रामकता दिखाकर खुद को मंझा हुआ पत्रकार साबित कर सकते थे। लेकिन इनकी इस कोशिश को बेहद ही घटिया और फूहड़ता ही कहा जा सकता है उससे ज्यादा कुछ नहीं।

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