मधुबनी: किसी ने फोटो कॉपी तो किसी ने बहन की किताब पढ़ कर दी परीक्षा

नीरज झा/मधुबनी
पटना/बिहार:  राज्य के सभी प्रारंभिक विद्यालयों में वर्ग एक से आठवीं तक के बच्चों का वार्षिक मूल्यांकन प्रारंभ हो गया है। सोमवार से परीक्षा चल रही है। परीक्षा के चौथे दिन आज सामाजिक विज्ञान की परीक्षा ली गई। लेकिन इस बार की परीक्षा अहम मानी जा रही है, क्योंकि बच्चे को किताब उपलब्ध ही नहीं हुआ है। वे बिना किताब पढे ही परीक्षा दे रहे हैं। किताब नहीं मिलने से पूराना किताब सीनियर बच्चों से लेकर एडजस्ट करने में परेशानी का सामना करना पड़ा है। सिलेबस तो स्कूल में पूरा कर दिया गया था। लेकिन बच्चों को घर मे पढने में पूरा किताब नहीं रहने से दिक्कत हो रही है। ऐसे में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के दावे को पोल खोलती है किताब नहीं उपलब्ध होना। नैनिहाल आखिर कैसे बिना  किताब पढे दे रहे हैं परीक्षा।
इस मामले की सही पडताल के लिए News Trend India की तरफ से जिले के बाल मध्य विद्यालय मधुबनी में वार्षिक मूल्यांकन परीक्षा का जायजा लिया गया।  जिसमें अधिकांश बच्चे बिना किताब पढे ही परीक्षा देने को मजबूर है। स्कूल में जहां कुछ बच्चे पुराने किताब पढ़ कर परीक्षा दे रहे हैं । वहीं बाल मध्य विद्यालय मधुबनी में किताब की फोटो स्टेट कर पढ़ाई करने की बात बच्चों ने कही। बाल मध्य विद्यालय कक्षा आठ के छात्र अनीष कुमार ने बताया कि मौखिक के बदले लिखत परीक्षा देना अच्छा लगता है, क्योंकि याद किए गए प्रश्नों को लिख कर देने मे सहूलियत होती है।
वही किताब उपलब्ध नहीं रहने के सवाल पर बताया कि परेशानी का सामना करना पड़ा, दूसरे छात्रों के पुराने किताब से फोटो स्टेट कर  तैयारी की। कक्षा छह के छात्र ने बताया कि बहन एक क्लास सीनियर थी, तो मुझे किताब मिल गई। कक्षा आठ की छात्रा ने कहा कि सीनियर से मांगकर किताब लिया और तैयारी की। पूरे क्लास में मात्र चार सेट किताब थी। किसी के पास भी पूरी किताबें नहीं थी। लिखित परीक्षा के जवाब में कहा कि लिखित परीक्षा देने मे ही अच्छा लगता है। इसमें सोच समझ कर उत्तर लिखती हूं । मौखिक प्रश्न के जवाब देने में हेजिटेशन होता था। वहीं बहुत से छात्रों ने बताया कि दोस्त की बहन से किताब लिया। कुछ गाइड बाहर से खरीदे हैं तब तैयारी की।
हलाकिं बच्चे को किताब नहीं मिलने का मलाल साफ तौर पर उनके चेहरे से झलक रही थी।  वहीं परीक्षा में जो प्रश्न आए हैं तो कक्षा मे उसकी पढ़ाई हुई थी या नहीं पर छात्रों ने तो हां में सुर मिला दिया। इस बाबत जब जानकारी मांगी गई तो शिक्षकों द्वारा कहा गया कि प्रत्येक कक्षा के सिलेबस पाठ्यक्रम पुस्तक परियोजना से मिला है तो उससे ही तैयारी करवाई गई है।
ग्रेडिंग सिस्टम में परेशानी
भट्ठा मध्य विद्यालय  की  प्रधानाध्यापक आशा कुमारी ने बताई  कि सरकार के  ग्रेडिंग सिस्टम के कारण परीक्षा का डर बच्चों के मन से समाप्त हो गया है। बच्चों को फेल होने का डर है ही नहीं।  बच्चे पढ़ते ही नहीं है। किताब की वैकल्पिक व्यवस्था कर बच्चों की तैयारी करवाई जा रही है।
बच्चे जमीन पर बैठकर दे रहे हैं परीक्षा
चौंकिए मत बिहार सरकार बच्चो का वार्षिक मूल्यांकन कुछ इस प्रकार से कर रही है। यह बच्चे पूर्णिया जिला शिक्षा कार्यालय से महज 100 मीटर दूर स्थित आरक्षी मध्य विद्यालय कचहरी के है।  कक्षा छठी के बच्चे के लिए  बेच मेज तक पर्याप्त नहीं है। जिसके कारण कुछ

बच्चे नीचे बैठकर परीक्षा दे रहे हैं आप देख सकते हैं किस तरह से एक दूसरे सट कर बैठे हुए हैं कॉपी रखने तक का जगह नहीं है। ऐसे में कदाचार मुक्त परीक्षा का सवाल अधर में लटका है।
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