आम के मंजर को नुकसान से बचाने के लिए करें ये उपाय

प्रियांशु आनंद/कटिहार

कटिहार/बिहार:  मौसम में बदलाव के समय फसलों की सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी की आवश्यकता होती है। इस मौसम में कीट व्याधि का प्रकोप बढ़ने एवं मौसम में बदलाव के कारण नमी का ध्यान रखना आवश्यक होता है। आम व लीची के मंजर के साथ ही फसलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखने की जरुरत होती है। शुरूआती सतर्कता बरतकर किसान मौसम के कारण फसलों को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। इस मौसम में मंजर में झुलसा रोग की संभावना प्रबल होती है।

बढ़ जाता है कीट व्याधि का प्रकोप

कीट-व्याधि का प्रकोप बढ़ने के कारण फसलों के उत्पादन एवं तैयार फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इस मौसम में मिर्च, टमाटर व सब्जी की खेती की जाती है। इसके तैयार फसल को भी लगाने के लिए भी उपचारित करने की आवश्यकता होती है। सब्जी की फसल में चूसक कीटों का प्रकोप होता है। इसके लिए भी खास ध्यान देने की आवश्यकता है। मसूर व तोड़ी की फसल की कटाई को लेकर भी समय का चुनाव काफी आवश्यक है। कीट व्याधि के नियंत्रण के लिए फसल को ढक कर रखना आवश्यक होता है। फसल के 75 से 80 फीसद पकने एवं फलों का रंग भूरा होने के कारण फसल की कटाई करनी चाहिए। इस दौरान फसलों में चितकबरा बग से नुकसान की संभावना बनी रहती है। इससे बचने के लिए फसल को शीघ्र तैयार कर अवशेष को नष्ट करने से कीट व्याधि की संभावना काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मंजर वाली फसल के लिए जरूरी है प्रबंधन

बदलते मौसम में मंजर वाले फसलों में झुलसा रोग की संभावना बढ़ जाती है। मुख्य रूप से आम के मंजर में झुलसा रोग का प्रभाव सबसे अधिक होता है। इससे बचाव के लिए हैक्सा कोनाजोल एक एमएल प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। मंजर व बाग में फुदका कीट का प्रकोप बढ़ने पर इमिडाक्लोप्रिड 0.3 एमएल प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। वही सब्जी की फसल में कानफीडोर 0.5 एमएल प्रति तीन लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। सब्जी के तैयार पौधा को लगाने के पूर्व इमिडाक्लोप्रिड का घोल बनाकर इसे 15 मिनट डुबोकर उपचारित करना चाहिए। साथ ही कीट व्याधि के प्रकोप पर नजर रखनी चाहिए। कीट की पहचान कर इसके अनुरूप रसायन का प्रयोग करना चाहिए।

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