बाढ़ पीड़ित मधुबनी में NDRF की बोट पर हुआ बच्चे का जन्म

पटना:  बिहार में बाढ़ से इंसान की जिंदगी बद से बदतर हो चुकी है। हलांकी एनडीआरएफ और सेना के जवान युद्ध स्तर पर लोगों तक राहत पहुंचाने में लगे हैं। लेकिन उसके बावजूद भी हजारों लोग ऐसे हैं जो अब भी बाढ़ में फंसे हैं। मोताहारी में एक परिवार के लिए एनडीआरफ की टीम की कोशिश वरदान साबित हुई।

एनडीआरएफ की टीम यहां राहत और बचाव का काम कर रही थी। तभी उन्हें जानकारी मिली कि एक घर में परिवार के कुछ लोग फंसे हैं। जब बचाव दल वहां पहुंचा तो पता चला परिवार में एक महिला को प्रसव पीड़ा हो रही है। जिसके बाद टीम के लोगों ने महिला को किसी तरह से अपनी रेस्क्यू बोट पर बिठाया। महिला के साथ परिवार के कुछ लोग भी उस बोट में सवार हुए।

बाढ़ की वजह से दूर दूर तक केवल पानी ही नजर आ रहा है। थाना, स्कूल, अस्पताल सबकुछ जलमग्न हैं। ऐसे में एनडीआरएफ की टीम उस महिला को लेकर राहत शिविर की तरफ बढ़ी। लेकिन इससे पहले की वो राहत शिविर तक पहुंच पाते महिला प्रसव पीड़ा से बेचैन हो गई। इससे पहले कि उनकी बोट राहत शिविर तक पहुंच पाती बीच रास्ते में ही महिला ने एनडीआरएफ की बोट पर ही बच्चे को जन्म दे दिया।

बिहार के जिन 13 जिलों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर है वो हैं किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी, सिवहर, सुपौल और मधेपुरा। बाढ़ से सबसे अधिक मौत अररिया में हुई है। यहां 20 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य सरकार की तरफ से बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। राज्य के 200 से ज्यादा राहत शिविरों में 93 हजार लोग शरण लिये हुए हैं।

एनडीआरएफ की 22 टीम राहत बचाव के काम में लगी हैं। इनमें एनडीआरएफ के 949 जवान शामिल हैं। इसके अलावे सेना के 300 जवान भी नौकाओं के साथ लोगों को बाहर निकालने में जुटे हैं। वायुसेना के दो हेलिकॉप्टर लोगों तक खाने का सामान पहुंचाने में जुटे हैं।

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