बिहार में बाढ़ से 70 लाख लोग बेघर, अबतक 59 लोगों की मौत

पटना:  बिहार में बाढ़ ने अपना विभत्स रूप ले लिया है। राज्य के 13 जिले पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ से अबतक 70 लाख लोग बेघर हो चुके हैं। जबकि मरनेवालों की संख्या 59 तक पहुंच चुकी है। ये आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। सीएम नीतीश कुमार ने बाढ़ ग्रस्त दरभंगा के कई इलाकों का हवाई सर्वेक्षण मंगलवार को किया था। राज्य सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती पीड़ितों तक राहत और बचाव कार्य को पहुंचाना है।

बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ की कई कंपनियों को लगाया गया है। लेकिन अभी भी कई इलाके ऐसे हैं जहां लोगों तक राहत का सामान नहीं पहुंच चुका है। जो लोग बेघर हुए हैं उनके लिए सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि उन्होंने किसी तरह से अपनी जान तो बचा ली लेकिन उनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है। क्योंकि घर का अनाज पानी में डूब चुका है।

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बिहार के जिन 13 जिलों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर है वो हैं किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी, सिवहर, सुपौल और मधेपुरा। बाढ़ से सबसे अधिक मौत अररिया में हुई है। यहां 20 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य सरकार की तरफ से बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। राज्य के 200 से ज्यादा राहत शिविरों में 93 हजार लोग शरण लिये हुए हैं।

एनडीआरएफ की 22 टीम राहत बचाव के काम में लगी हैं। इनमें एनडीआरएफ के 949 जवान शामिल हैं। इसके अलावे सेना के 300 जवान भी नौकाओं के साथ लोगों को बाहर निकालने में जुटे हैं। वायुसेना के दो हेलिकॉप्टर लोगों तक खाने का सामान पहुंचाने में जुटे हैं।

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पूर्णिया में कुछ इलाकों से बाढ़ का पानी तो कम हुआ है लेकिन लोगों के पास रहने के लिए कुछ नहीं बचा है। घर तबाह हो चुके हैं। यहां एक नई परेशानी ये सामने आने वाली है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद बीमारी अपने पैर न पसार ले। जिन घरों में पानी भर चुका है वहां लोग किसी तरह से अपने सामान को बचाकर सुरक्षित बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं।

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