पटना: निजी स्कूलों को सख्त दिशा निर्देश ‘फीस के लिए बच्चों का शोषण अपराध’

नीरज झा/पटना
पटना/बिहार:  राज्य के निजी स्कूलों के संचालक अब फीस के लिए बच्चों पर दबाव नहीं बनाएंगे। शिक्षा निदेशालय द्वारा इससे संबंधित निर्देश जारी किया गया है। यदि फीस को लेकर स्कूल संचालक बच्चों पर दबाव बनाते हैं तो अभिभावक इसकी शिकायत विभाग से कर सकते हैं। ऐसी शिकायत पर स्कूलों के खिलाफ राज्य का शिक्षा विभाग कार्रवाई करेगा। शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक नए सत्र में इसे हर हाल में लागू करना होगा।
इस निर्देश के जारी होने के बाद अभिभावकों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। बकाए फीस के लिए स्कूल संचालक सीधा अभिभावक से संपर्क करेंगे। फीस को लेकर बच्चों से न तो कोई बात होगी और न ही चुकाने के लिए कहा जाएगा। जो भी शिकायतें होंगी, स्कूल संचालक अभिभावक से करेंगे। वर्तमान में पूरे राज्य में जितने भी मान्यता प्राप्त निजी स्कूल हैं सभी पर नए निर्देश लागू होंगे।
बच्चों को मानसिक प्रताड़ना से बचाने के लिए हुई यह पहल
पूर्व में ऐसे कई मामले सामने आये है जिसमें बकाए फीस को लेकर स्कूल संचालकों द्वारा बच्चों के हाथों में रसीद थमा दी जाती थी। उनपर बकाए फीस को चुकता करने के लिए दबाव बनाया जाता था। कई स्कूलों में तो फीस जमा करने में विलंब होने पर नाम काटने तक की धमकी दे दी जाती है। ऐसे में बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। जिसे केंद्रीय बाल संरक्षण आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने शिक्षा निदेशालय से समन्वय स्थापित कर यह निर्देश जारी किया।
शिकायत पर होगी कार्रवाई
सर्व शिक्षा अभियान पूर्णिया के डीपीओ रतीश कुमार झा ने बताया कि नए सत्र की शुरूआत में सभी निजी स्कूलों से ब्यौरा मांगा गया है। बच्चों पर फीस के लिए दबाव नहीं बनाने से लेकर आरटीई के पालन का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इस तरह का मामला अगर साक्ष्य के साथ आता है तो इसपर कार्रवाई की जायेगी। इससे संबंंधित कई और मामलों को लेकर निजी विद्यालयों के साथ अभिभावकों के साथ एक मीटिंग भी रखी गई है। शिक्षा निदेशालय के निर्देश पर सभी निजी स्कूलों को पत्र भेजा जा रहा है।
अधिकांश स्कूलों में आरटीई का भी नहीं होता पालन
राज्य के  अधिकांश स्कूलों में आरटीई का पालन नहीं होता है। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी गरीब बच्चों का नामांकन लेने का दावा तो किया जाता है, पर वास्तविकता अलग हाेती है। बीपीएल परिवार के बच्चों का नामांकन लेकर उन्हें निशुल्क पढ़ाने के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है। यही वजह है कि बार-बार निर्देश के बावजूद अधिकांश स्कूलों द्वरा यू-डायस फाॅर्म भरकर विभाग को जमा नहीं किया जाता है। हालांकि विभाग अब ऐसे स्कूलों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है।
शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो जायेगी
विभाग के इस निर्देश पर प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर पूर्णिया के अध्यक्ष उदय शंकर सिंह ने कहा बच्चों से फीस के लिए नहीं कहां जाता है। लेकिन कई अभिभावक ऐसे है जिनकों फीस के लिए बार-बार कहा जाता है, लेकिन फीस जमा नहीं करते हैं। उस स्थिति में ही बच्चों से कहा जाता है। वहीं सरकार की नीति पढ़ाने पर नहीं है। जो निजी विद्यालय में पढ़ाई होती है, वो भी नहीं होगी। जो व्यवस्था चल रही है
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