बिहार में यहां रोज लगता है 22 KM लंबा जाम, मनमानी के आगे प्रशासन बेबस

बांका/बिहार:  भगवान ना करे किसी को भागलपुर जाने की जरुरत पड़े। क्योंकि देवघर, गोड्डा और दुमका से भागलपुर जानेवाले मुख्य मार्ग पर नियम कानून की नहीं ट्रकों की मनमानी का राज चलता है। ट्रक चालक रोजाना कानून को अपने भारी भरकम पहियों के नीचे कुचलते हैं और प्रशासन के हिस्से आता है उस कुचले हुए कानून का पंचनामा तैयार करने का काम। क्योंकि ढाका मोड़ से आगे बढ़ने के बाद और जगदीशपुर तक पहुंचने के बीच कानून को कोतवाली में कैद कर दिया जाता है और सड़क पर सैंकड़ों ट्रक चालक  अपनी मनमानी करते रहते हैं। ये वाक्या एक दिन का नहीं है महीनों से यहां ऐसा ही होता आया है।

दरअसल नोएंट्री से पहले ही सुबह 6 बजे से ट्रक चालक अपने अपने ट्रकों को दो लेन वाले इस सड़क पर बीच सड़क पर खड़ी कर देते हैं। जिसकी वजह से एक तरफ से सड़क पर आवाजाही पूरी तरह से बंद हो जाती है। अब जो बाकी का जगह होता है उसी से बाकी गाड़ी गुजरते हैं। अगर सामने से कोई ट्रक आ जाए तो फिर भगवान ही मालिक है। इस तरह से ट्रकों की मनमानी की वजह से सड़क दो लेन से सिंगल लेन हो जाती है। जबकि सड़क से गुजरने वाली गाड़ियों की तादाद हजारों में होती है।

सड़क पर मचे इस अव्यवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस सड़क पर लोग दो से तीन घंटे तक जाम में रोज फंसते हैं। जबकि ट्रक ड्राइवर अपनी ट्रक सड़क पर खड़ी कर आराम से कहीं सो रहे होते हैं। ट्रक के पास कोई मौजूद नहीं होता है। ना ही ट्रक ड्राइवर होता है और ना ही प्रशासन का कोई आदमी। क्योंकि दोनों ही जानते हैं अगर वो वहां दिख जाएंगे तो लोग उनसे अपनी परेशानी की शिकायत करेंगे।

अब ये जान लीजिये कि भागलपुर जाना मजबूरी क्यों है?

आसपास के जो बाकी शहर हैं जैसे देवघर, गोडड् या देवघर इन जगहों से काफी संख्या में लोग इलाज कराने भागलपुर जाते हैं। अब आप सोचिये अगर कोई एंबुलेंस मरीज को लेकर भागलपुर जा रहा हो और इस जाम में फंस जाए तीन-चार घंटे तक तो उस मरीज का क्या होगा। क्योंकि बीच सड़क पर ट्रक की पार्किंग की वजह से इतनी जगह भी नहीं बचती है कि किसी तरह से लोग एंबुलेंस को आगे निकलने के लिए जगह दे सकें। क्योंकि बीच में फंसी हुई सभी गाड़ियों के लिए एक ही विकल्प है वो जाम के खत्म होने का इंतजार करते रहें।

लोग खरीदारी के काम से भी भागलपुर ही जाते हैं। दुकानदार अपने दुकान का सामान लेने भागलपुर का रूख करते हैं। लेकिन इस जान ने उनके व्यापार का सारा रस निचोड़ लिया है। अगर किसी को दिल्ली जाना हो तो वो भी भागलपुर ही जाते हैं ट्रेन पर सवार होने। इसलिए इस रास्ते पर बड़ी संख्या में ट्रेन में सवार होने वाले मुसाफिर भी जाम में फंसे मिल जाएंग। सोमवार को इस बारे में सीएम नीतीश कुमार को कई ट्वीट किये गए लेकिन उनकी तरफ से भी कोई जवाब नहीं आया। डिप्टी सीएम सुशील मोदी को भी टैग कर ट्वीट किये गए लेकिन वो भी खामोश रहे।

उनकी खामोशी बताती है कि उनका ट्वीटर अकाउंट केवल सियासी बयानबाजी के इस्तेमाल होता। मुसीबत में फंसी जनता के समस्या के समाधान के लिए नहीं। और स्थानीय प्रशासन से तो आप कोई उम्मीद रखिये ही नहीं। क्योंकि वो सबकुछ देखकर भी अंधा बना हुआ है। डीएम, एसपी, इंस्पेक्टर, एचएचओ केवल महकमे की शोभा बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।

 

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