अररिया लोकसभा उपचुनाव में तस्लीमुद्दीन की विरासत पर दो भाईयों की जंग

अररिया लोकसभा उपचुनाव में तस्लीमुद्दीन की विरासत पर दो भाईयों की जंग

 नीरज झा/पूर्णिया
अररिया/बिहार: अररिया लोकसभा उपचुनाव का बिगुल बजते ही उम्मीदवारी और विरासत संभालने के लिए जोर आजमाइश तेज हो गई है। ये विरासत है तस्लीमुद्दीन की। चुकी अब वो रहे नहीं इसलिए उनकी विरासत उनके दो बेटे में से किसी एक को मिलनी है। इस इलाके में जीत के लिए तस्लीमुद्दीन का वरद हस्त होना जरुरी था। लेकिन उनकी विरासत संभालने के लिए उनके दो बेटे सरफराज और मो. मोकिम की अपनी अपनी दावेदारी है। चुकी मोकिम बड़े पुत्र हैं इसलिए उनकी दलील है कि विरासत उनको  मिलनी चाहिए। लेकिन दूसरी तरफ सरफराज हैं जिन्होंने 4 जनवरी को तस्लीमुद्दीन के जयंती समारोह पर खुद को उनका उत्तराधिकारी बता दिया था।
हाल ही में सरफराज का एक फोटो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ। जिसमें वो बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के साथ दिखाई दे रहे हैं। इसका मतलब ये निकाला जा रहा है सरफराज आरजेडी से अररिया लोकसभा उपचुनाव में टिकट के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। अबतक सरफराज जेडीयू में हुआ करते थे। लेकिन 2016 में उन्हें बाहर कर दिया गया था। जिसके बाद से वो अपनी सियासत को जिंदा रखने के लिए किसी नए चौखट की तलाश में थे।
यही कारण है कि जदयू से निलंबित विधायक सरफराज आलम के आरजेडी खेमे में जाने की बात जंगल में आग की तरह फैलने लगी है। हालांकि अबतक आधिकारिक तौर पर सरफराज आलम के टिकट मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन उनके साथ मो तस्लीमुद्दीन का नाम जुड़ा होने का फायदा न सिर्फ राजनीतिक मैदान में मिलेगा बल्कि राजद से भी टिकट मिलने की पूरी उम्मीद देखी जा रही है।
दूसरी ओर अबकी बार अररिया लोकसभा क्षेत्र की तस्वीर इसलिए भी दिलचस्प दिख रही है कि मो तस्लीमुद्दीन के बड़े पुत्र मो. मोकिम  के भी चुनावी मैदान में ताल ठोंकने की बात सामने आ रही है। जिससे यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरफराज आलम ही आरजेडी के उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि मोकिमुद्दीन ने इलाके में बतौर विधायक या फिर सांसद फिलहाल कोई राजनीतिक पारी की शुरूआत नहीं की है और वे सरकारी सेवा में भी हैं।
लेकिन अपने पिता का नाम और राजनीतिक पहुंच का फायदा उन्हें भी मिलत सकता है। ऐसे में शह और मात के इस खेल में कौन किसे पटखनी देगा कहना थोड़ा मुश्किल जरूर है। लेकिन वर्तमान हालात सरफराज आलम के पक्ष में भारी होता दिख रहा है। वहीं मोकिमुउद्धीन  ने बताया कि पिता के उत्तराधिकारी के रूप में उन्हें ही मिलनी चाहिए टिकट क्योंकि किसी भी परिवार का उत्तराधिकारी बडे बेटे को ही मिलता है।
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