ब्रांड की महंगी गाड़ियां क्रैश टेस्ट में हुई फेल

ब्रांड की महंगी गाड़ियां क्रैश टेस्ट में हुई फेल

  • महंगी गाड़ियों के बेसिक मॉडल में नहीं है आपकी सुरक्षा की गारंटी
  • ग्लोबल NCAP के क्रैश टेस्ट में गाड़ियों को मिली 0 स्टार रेटिंग

आमतौर पर आप बड़े ब्रांड की गाड़ियां ये सोचकर खरीदते हैं कि उसमें आप सुरक्षित सफर कर सकेंगे। लेकिन ग्लोबल NCAP की तरफ किये गए क्रैश टेस्ट में इन कंपनियों की गाड़ियां पूरी तरह से फेल हो गई। इस टेस्ट के लिए गाड़ियों के बेसिक मॉडल को चुना गया था। यानि टेस्ट के लिए वो गाड़ियां चुनी गई थी जिनमें एयर बैग नहीं होते हैं। जिन कंपनियों की गाड़ियों को क्रैश टेस्ट में शामिल किया गया था उनमें

  • ह्यूंदईइ ईऑन
  • महिंद्रा स्कॉर्पियो
  • रेनो क्विड
  • मारूती सुजुकी सेलेरियो
  • मारुती सुजूकी इको

इन कंपनियों के बेसिक मॉडल को इस क्रैश टेस्ट में शामिल किया गया। लेकिन जब इस टेस्ट के नतीजे आए तो हैरान करनेवाले थे। क्योंकि कोई भी गाड़ी टेस्ट में पास नहीं हो सकी। टेस्ट के दौरान जब गाड़ी की टक्कर कराई गई तो वो बुरी तरह से टूट गई। किसी गाड़ी का आगे का हिस्सा चकनाचूर हो गया तो टक्कर के बाद किसी का पिछला हिस्सा हवा में उछल गया। इतना ही नहीं टेस्ट के दौरान गाड़ी के भीतर जो आर्टिफिशियल सवारी बिठाया गया था उसे भी काफी नुकसान हुआ। खासकर पीछे की सीट पर जहां अक्सर बच्चों को बिठाया जाता है वहां भी गाड़ी को काफी नुकसान हुआ। सीट बेल्ट केवल नाम की रहीं। क्योंकि टक्कर के बाद सीट बेल्ट सुरक्षा देने में नाकाम रही। हलांकी इसमें उन्हीं गाड़ियों को शामिल किया गया था जिनमें एयरबैग नहीं थे। यानि ये गाड़ियों के बेसिक मॉडल थे। टेस्ट के दौरान इन गाड़ियों की स्पीड 64 किलोमीटर प्रति घंटा की रखी गई थी। इसी स्पीड से इनकी टक्कर कराई गई। लेकिन जब नतीजे सामने आए तो इन गाड़ियों को सुरक्षा के मामले में 0 स्टार रेटिंग दी गई। पिछली बार भी इस तरह का क्रैश टेस्ट हुआ था । उसमें भी गाड़ियां पास नहीं हुई थीं।

क्या होता है क्रैश टेस्ट?

क्रैश टेस्ट में ये पता लगाया जाता है कि गाड़ियां कितनी मजबूत हैं और हादसा होने की सूरत में गाड़ी के भीतर बैठे यात्री कितने सुरक्षित रहते हैं। इसके लिए एक निश्चत गति सीमा से गाड़ियों को चलाकर उनकी टक्कर करवाई जाती है। जिसके बाद कंप्यूटर के जरिये ये पता लगाया जाता है कि टक्कर से गाड़ियों को कितना नुकसान हुआ और उसके अंदर बैठे सवारी को कितनी चोट पहुंची। क्रैश टेस्ट में इस बात पर भी नजर रखी जाती है की टक्कर के दौरान गाड़ी की क्या स्थिति थी। इन सब बातों के बाद क्रैश टेस्ट के परिणाम तैयार किये जाते हैं।

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