दलित पिटाई पर संसद में संग्राम, हंगामे के बीच गृहमंत्री ने दिया बयान

11 जुलाई को गुजरात के सोमनाथ जिले के उना गांव में दलितों की पिटाई का मामला आज संसद के दोनों सदनों में उठा। लोकसभा में प्रश्नकाल के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दलितों की पिटाई पर बयान दिया। जिसमें राजनाथ सिंह ने कहा कि उना की वारदात से प्रधानमंत्री भी आहत हैं। इस मामले में आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। राज्य सरकार पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये देगी। दलितों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार की तरफ से उठाया जा रहा है। इस मामले में ड्यूटी में लापरवाही बरतने के अपराध में 4 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसे लेकर एक जांच दल का गठन किया गया है। इस मामले में 60 दिनों में चार्जशीट दायर करने को कहा गया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि हम इस केस की जल्द सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट चाहते हैं। जिससे कि जल्द सुनावई हो सके। इसके लिए हाईकोर्ट से बात की जा रही है।

राजनाथ सिंह ने उना मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार की तरफ से की गई कार्रवाई पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि इस मामले को शांत करने के लिए राज्य सरकार ने सही कदम उठाया है। राज्य सरकार की तरफ से की गई कोशिशों की सराहना होनी चाहिए।

लेकिन विपक्ष गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बयान से संतुष्ट नहीं था। कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस मामले में ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी का गठन होना चाहिए। और वो जांच करे कि इसमें कौन कौन शामिल है और कौन दोषी है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बायान देने के दौरान ही हंगामा शुरु हो गया। जिसके बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि बीजेपी के शासन में दलित ज्यादा सुरक्षित हैं। कांग्रेस के शासनकाल में दलितों पर अनगिनत हमले हुए। उन्होंने हरियाणा का भी जिक्र किया । जहां एक गांव में दलितों के घर में आग लगा दी गई थी। और उन परिवारों को गांव छोड़कर जाना पड़ा था। तब हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी।

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