स्वर्ण मंदिर में Kejriwal ने धोए लंगर के बर्तन, दूर होगी सिखों की नाराजगी ?

कुछ दिनों पहले आम आदमी पार्टी की तरफ से कुछ ऐसा कर दिया गया और कुछ ऐसा कह दिया गया कि पार्टी को भारी नुकसान की चिंता सताने लगी। ऐसा कहा और किया भी AAP के एक ऐसे नेता की तरफ से गया था कि पार्टी उनके बयानों से किनार भी नहीं कर सकती थी। इसलिए उसकी भरपाई के लिए माफी और प्रायश्चित ही एक मात्र रास्ता बचा था। क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया जाता नुकसान काफी बड़ा हो सकता था। कोई दूसरा रास्ता भी नहीं बचा था AAP के पास सिखों की नाराजगी दूर करने के लिए।

दरअसल कुछ दिनों पहले आम आदमी पार्टी के नेता आशीष खेतान ने पार्टी के यूथ मेनिफेस्टो की तुलना गुरुग्रंथ साहिब से कर दी थी। जिसपर सिख समुदाय नाराज हो गया। जिसके बाद पार्टी को अपनी गलती का एहसास हुआ और पार्टी ने सिख समुदाय से कहा कि ये गलती अनजाने में हुई है। और इसके लिए वो माफी मांगते हैं। लेकिन पार्टी को ये एहसास हो रहा था कि केवल माफी काफी नहीं है। इसलिए सोमवार को दिल्ली के सीएम अरविंद Kejriwal और आशीष खेतान अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पहुंचे। गुरुद्वारे में अरदास किया। अनजाने में हुई गलती के लिए प्रायश्चित किया और माफी मांगी। गुरुद्वारे में Kejriwal ने तकरीबन डेढ़ घंटा बिताया। जिसमें Kejriwal और आशीष खेतान ने लंगर के बर्तन भी साफ किये।

Kejriwal ने स्वर्ण मंदिर के इस दौरे को पूरी तरह से राजनीति से दूर रखने की कोशिश की। इसलिए इस दौरे के साथ ना तो कोई और रैली रखी गई, ना ही राजनीतिक मेल मिलाप का कर्यक्रम रखा गया और ना ही कोई राजनीतिक बयान जारी किया गया। Kejriwal ने केवल इतना ही कहा कि अनजाने में हुई गलती के लिए माफी मांगी, इसके बाद हमें मानसिक शांति मिली।

ये सबकुछ करना पार्टी के लिए जरुरी भी था और मजबूरी भी। हलांकी इसके बाद भी ये साफ नहीं कि इस पश्चाताप का फल AAP के हक में होगा या नहीं। क्योंकि जिस गलती को आम आदमी पार्टी अनजाने में हुई गलती मान रही है सिख समुदाय उसे बड़ी गलती मान रहा है और इतनी जल्दी उनकी नाराजगी दूर हो जाएगी इसकी उम्मीद भी कम नजर आ रही है।

दूसरी तरफ बीजेपी इस मुद्दे को पंजाब विधानसभा चुवाव तक चर्चा में रखना चाहती है। क्योंकि AAP से सिखों की नाराजगी में फायदा बीजेपी का है। बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता ने स्वर्ण मंदिर में Kejriwal के प्रायश्चित पर कहा कि ‘माफी मांगने से इंसान की फितरत नहीं बदलती। AAP की आदत है धर्मिक ग्रंथ और धार्मिक भावना को ठेंस पहुंचाना। इसके लिए माफी काफी नहीं है।‘

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