फिल्म के डायरेक्टर की तरह सीबीआई कोर्ट के जज ने फैसला सुना दिया- हाईकोर्ट

नई दिल्ली:  आरुषी मर्डर केस में जिस तरह से सीबीआई की अदालत ने तलवार दंपत्ति को बेटी का कातिल बना दिया उसपर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काफी सख्त टिप्पणी की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट के जज पर भी तीखी टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी गणित के सवालों की तरह इस केस में फैसला सुना दिया गया। परिस्थिति जन्य साक्ष्यों को ही अंतिम सबूत मान लिया गया और फैसला सुन दिया गया।

एबीपी न्यूज वेबसाइट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरफ से की गई सख्त टिप्पणी पर रिपोर्ट छापी गी है। जिसके मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा आरुषी केस को किसी मैथ्स के प्रॉब्लम की तरह सॉल्व कर दिया गया। ऐसा नहीं होना चाहिए था। क्योंकि कानून में सबूत और गवाह अहम माने जाते हैं। ना कि एक पहेली की करह किसी केस को सॉल्व करना चाहिए। सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में कहानी की तरह खुद ही मान लिया कि उस रात नोएडा के जलवायु विहार के L 32 फ्लैट में क्या हुआ था।

सीबीआ कोर्ट के जज पर सख्त टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा ऐसा लगता है जैसे जज को कानून की सही जानकारी तक नहीं थी। इसी वजह से उन्होंने कई सारे तथ्यों को खुद ही मानकर फैसला दे दिया जो थे ही नहीं। ट्रायल जज एक गणित के टीचर की तरह व्यवहार नहीं कर सकता। ट्रायल जज ने L 32 में जो कुछ हुआ उसे एक फिल्म निर्देशक की तरह सोच लिया। कानून के बुनियादी नियम को जज ने फॉलो नहीं किया। ट्रायल जज को खुद पर संयम रखकर तथ्यों को तोड़ना मरोड़ना नहीं चाहिए था। ट्रायल जज को चाहिए कि वो पारदर्शी और निष्पक्ष हो। ऐसा लगता है कि ट्रायल जज अपनी कानूनी जिम्मेदारियों से अनजान हैं।

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