आतंकियों के खिलाफ ‘कासो’: कश्मीर में आतंकियों अब सेना ‘कासो’ से पकड़ेगी

नई दिल्ली:  कश्मीर में आतंकियों पर काबू पाने के लिए सेना ने एक बड़ा फैसला लिया है। जिसके मुताबिक सेना अब घाटी में दोबारा कासो का इस्तेमाल शुरु करेगी। कासो का इस्तेमाल आतंकियों के ठिकानों पर मारी जाने वाली छापेमारी में होती है। इसका मतलब है घेरा डालना और तलाशी अभियान। कुछ दिनों पहले सेना के 4000 हजार जवानों ने दक्षिण कश्मीर में छापेमारीका बड़ा अभियान चलाता था। कासो भी उसी से मिलता जुलता है।

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घाटी में पहले भी कासो चलाया जाता था। लेकिन सेना ने इसे 15 साल पहले छोड़ दिया था। इसकी वजह थी इससे आम लोगों को होनेवाली दिक्कतें। जिस इलाके में कासो के तहत तलाशी अभियान किया जाता है वहां की आम जमता को परेशानी होती है। जिसकी वजह से सेना और आम जनता के बीच तनाव बढ़ता है और उनमें दूरियां भी बढ़ने लगती है।

सूत्रों के मुताबिक कासो का इस्तेमाल कुलगांम, पुलवामा, तराल, बडगांव और शोपियां में खास तौर से किया जाएगा। 2001 के बाद केवल खुफिया सूचना मिलने पर कुछ खास मौकों पर ही कासो का इस्तेमल किया गया।

हाल ही में सेना के लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की आंतंकियों ने हत्या कर दी थी। इसे देखते हुए कासो को फिर से शुरु करने का फैसला लिया गया है। हाल के दिनों में घाटी में आतंकी वारदात में भी बढ़ोतरी देखने में आया है। जिसके बाद ये जरुरी हो गया है कि कासो के तहत घेरा डालना और तलाशी अभियान सुरु करना जरुरी हो गया है।

 

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