आज है महाहड़ताल! देशभर के 18 करोड़ कर्मचारी नहीं कर रहे हैं काम

दिल्ली: देश आज महा हड़ताल से गुजर रहा है। 10 ट्रेड यूनियन के तकरीबन 18 करोड़ कर्मचारी आज काम नहीं कर रहे हैं। सरकार की नीतियों और अपनी मांगों के बीच आए फासले की वजह से दोनों के बीच गतिरोध खत्म नहीं हो सका। जिसकी वजह से इस देशव्यापी हड़ताल की नौबत आई।
हड़ताल की वजह से बैंक, बिजली, टेलीफोन, सरकारी दफ्तर, फैक्ट्री बंद हैं। हलाकी सरकार की तरफ से ये भरोसा दिया गया है कि जरुरी सेवाओं पर असर नहीं पड़ेगा। हड़ताल का असर कई जगहों पर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी देखा जा रहा है।

इस हड़ताल की सबसे बड़ी वजह है न्यूनतम मासिक वेतन और न्यूनतम मासिक पेंशन है। ट्रेड यूनियन की मांग है कि न्यूनतम मासिक वेतन 18000 रुपये और न्यूनतम मासिक पेंशन 3000 रुपये हो। इसके अलावे 11 ऐसी मांग है जिसके बारे में ट्रेड यूनियनों का कहना है कि सरकार के उदासीन रुख की वजह से उन्हें देशव्यापी हड़ताल का फैसला लेना पड़ा।

ट्रेड यूनियनों की आपत्ति बीमा और रक्षा क्षेत्रों में विदेशी निवेश के नियमों को शिथिल करने को लेकर है। घाटे में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बंद करने का भी श्रमिक संगठन विरोध कर रहे हैं। ट्रेड यूनियन सरकारी पेंशन फंड और स्टॉक मार्केट में अधिक पैसा लगाने के सरकार के दिशा निर्देश का भी विरोध कर रहे हैं।

पिछले दिनों सरकार ने अकुशल कामगारों की न्यूनतम दैनिक मजदूरी 246 रुपये से बढ़ाकर 350 रुपये कर दिये। सरकार की तरफ से कहा गया कि मिनिमम वेज अडवाइजरी बोर्ड की 29 अगस्त को हुई बैठक में न्यूनतम दैनिक मजदूरी पर राय मशविरा के बाद 350 रुपये तय की गई। जबकि इसपर ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि बोर्ड मीटिंग में ऐसे किसी प्रस्ताव पर चर्चा ही नहीं की गई थी।

बोर्ड मीटिंग के सदस्य कश्मीर सिंह ठाकुर ने श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय को चिट्टी लिखकर कहा कि मीटिंग में 350 रुपये का जिक्र ही नहीं हुआ। साथ ही लिखा गया की बोर्ड मीटिंग में श्रमिक संगठनों के सभी प्रतिनिधि मौजूद थे। सभी ने 18000 रुपये मासिक न्यूनतम भत्ता यानि (692 रु. प्रतिदिन) किये जाने की मांग की गई थी। ट्रेड यूनियन ये सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर सरकार ने 350 रुपये का फॉर्मूला कहां से लाया। और उस फॉर्मूले का आधार क्या है। इसी मुद्दे पर गतिरोध है और यही हड़ताल की वजह भी है।

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