एनडीए में शामिल होने के नीतीश के फैसले पर JDU में फूट, अली अनवर नाराज

नई दिल्ली:  बिहार में बुधवार की शाम से राजनीतिक घटनाक्रम इतनी तेजी से बदल रहा था जैसे मानो कोई सियासी सुनामी आई हो। दांव पर दांव चले जा रहे थे। बुधवार की शाम से लेकर गुरुवार के सुबह के ब्रह्म मुहुर्त तक पटना की सड़कें जागती रही। नीतीश से लेकर तेजस्वी तक पटना में राजभवन की तरफ मुंह किये बैठे थे। लेकिन फैसला तो राज्यपाल महोदय कर चुके थे। नीतीश कुमार गुरुवार सुबह 10 बजे एक बार फिर से बिहार के सीएम बन जाएंगे।

लेकिन जिस एनडीए के साथ मिलकर नीतीश बिहार में दोबारा सरकार बनाने जा रहे हैं उससे जेडीयू में फूट की शुरुआत हो गई है। जेडीयू से राज्य सभा सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता अली अनवर ने कहा है कि भले ही नीतीश ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर बीजेपी से हाथ मिलाने का फैसला किया होगा। लेकिन मेरा जमीर एनडीए के साथ जाने की इजाजत नहीं देता।

अली अनवर ने कहा कि नीतीश उन बातों को याद करें जिसके आधार पर हमने बीजेपी से अलग होने का फैसला किया था। अली अनवर ने कहा अगर उन्हें अपनी बात कहने का मौके मिलेगा तो वो पार्टी के सामने अपनी बात रखेंगे। उन्होंने कहा काफी दिनों से बीजेपी के साथ जाने की बात हो रही थी। 23 जुलाई को नेशनल काउंसिल की बैठक होनी थी। लेकिन उसे रद्द कर दिया गया। अगर उस दिन बैठक होती तो मैं अपनी बात पार्टी के मंच पर रखता।

अली अनवर के इस तेवर के बाद इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पार्टी में नीतीश के फैसले पर कई दूसरे विधायकों और सांसदों को भी आपत्ति होगी। लेकिन अभी तक वो खुलकर नहीं बोल रहे हैं। ऐसी संभावना इसलिए जताई जा रही है क्योंकि 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश को वो वोट भी मिले थे जो बीजेपी या मोदी के खिलाफ थे। लेकिन चुनाव के 20 महीने बाद दोबारा उसी बीजेपी से हाथ मिला लेने पर, हो सकता है बीजेपी के खिलाफ वोट पाने वाले उनके नेता दुखी, निराश या फिर हताश हों। क्योंकि जिस जनता ने उन्हें बीजेपी को हराने के लिए वोट किया था वो जनता तो ये जरुर कहेगी कि इसेस तो अच्छा होता बीजेपी को ही वोट दे देता।

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