अखिलेश के दरवाजे से बैरंग लौटे मुलायम के करीबी गायत्री प्रजापति

लखनऊ: समाजवादी पार्टी और मुलायम परिवार इन दिनों विवादों के उन रास्तों से गुजर रहे हैं जिसमें कई मोड़ हैं। हर मोड़ पर दिखाई देनेवाले हर समाजवादी से यही सवाल किया जा रहा है कि आप किस तरफ हैं ? चचा शिवपाल की तरफ या भतीजे अखिलेश की तरफ ? इस तरह के सवाल इसलिए किये जा रहे हैं क्योंकि चुनाव के वक्त पार्टी दफ्तर में जो बैठक विरोधी को पछाड़ने की रणनीति बनाने के लिए होनी चाहिए थी उन बैठकों में ये चर्चा हो रही है कि किस तरह से पार्टी को एक रखा जाए।

समाजवादी पार्टी में बैठक रोजाना की बात है। कभी मुलायम के घर बैठक होती है, कभी शिवपाल के घर बैठक होती है कभी शिवपाल मुलायम के घर जाते हैं तो कभी अखिलेश बैठक करते हैं। कुल मिलाकर समाजवादी इन दिनों बैठकें तो खूब कर रहे हैं लेकिन उन बैठकों के कुछ पुख्ता नतीजे नहीं निकल रहे हैं। क्योंकि विवाद जहां से शुरु हुआ था वो उससे आगे ही बढ़ गया है।

शनिवार को मुलायम के करीबी और अखिलेश कैबिनेट में मंत्री गायत्री प्रजापति अखिलेश यादव से मिलने उनके घर पहुंचे। लेकिन अखिलेश के दरवाजे से उन्हें वापस लौटना पड़ा। क्योंकि अखिलेश ने अपने ही मंत्री से मिलने से इनकार कर दिया। अखिलेश ने गायत्री प्रजापति को ही मंत्रीपद से हटा दिया था लेकिन बाद में मुलायम के बीच बचाव के बाद दोबारा कैबिनेट में शामिल किया गया।

शनिवार को अखिलेश अपने घर पर कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे तो दूसरी तरफ मुलायम अपने घर पर बैठक कर रहे थे। मुलायम के साथ बैठक में बेनी प्रसाद वर्मा, किरणमय नंदा, रेवती रमन और नरेश अग्रवाल शामिल थे। इस बैठक में शिवपाल यादव को भी बुलाया गया। इस बैठक में भी चर्चा का विषय यही रहा कि अखिलेश के तेवह किस तरह से नरम किये जाएं। क्योंकि मुलायम ने जब से कहा है कि चुनाव के नतीजे आने के बाद विधायक सीएम का चुनाव करेंगे। मुलायम के इसी बयान ने पार्टी को लेकर अखिलेश की सोच बदल गई ।

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