CM अखिलेश समाजवादी पार्टी को कहेंगे अलविदा, 17 नवंबर को करेंगे नई पार्टी का एलान !

लखनऊ: राजनीति कब कौन सी करवट ले ले इसके बारे में भविष्यवाणी असंभव है। केवल किसी अनहोनी के होने की संभावना व्यक्त की जा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि राजनीति सदा खुद को वक्त के हिसाब से बदलती है। उसके रास्ते बदलते हैं, साथी बदलते हैं, सोच बदलती है और जहां इतना सबकुछ बदलता है वहां नेताओं की राजनतिक पार्टी भी बदल जाती है।

यूपी में भी एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। खबर है कि 17 नवंबर के बाद यूपी में सीएम अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी से अलग होकर अपनी नई पार्टी का एलान कर देंगे। ये दावा हम नहीं कर रहे हैं ये दावा है एक पूर्व IAS सूर्य प्रताप सिंह का। सूर्य प्रताप सिंह ने अपने फेसबुक पर लिखा है कि 17 नवंबर के बाद अखिलेश अपनी नई पार्टी का एलान करेंगे।

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अपने इसी फेसबुक वॉल पर उन्होंने लिखा है कि मुलायम और शिवपाल का जमाना बीत चुका है। अगर सपा 2012 के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत में आई थी तो उसकी वजह अखिलेश यादव थे। तब की बात आज भी लागू होती है। सूर्य प्रताप सिंह का मानना है कि इसबार भी बगैर अखिलेश के समाजवादी पार्टी के लिए चुनाव में जीत हासिल करना मुमकिन नहीं है। अगर ऐसे में अखिलेश सपा से अलग होकर नई पार्टी बनाते हैं तो उनको जीत मिलने की संभावना ज्यादा होगी।

IAS सूर्य प्रताप सिंह का पूरा लेख इस प्रकार है…
‘अखिलेश यादव सपा का असली चुनावी फ़ेस है। मुलायम या शिवपाल का समय जा चुका है, इनके पास क्रिमिनल तत्वों के सिवाय कुछ नहीं है। सपा के ख़िलाफ़ anti-incumbency फ़ैक्टर इतना ज़बरदस्त है कि इनकी सत्ता में वापसी असम्भव है। भ्रष्टाचार, अनाचार से जनता त्रस्त है। परंतु यदि अखिलेश नयी पार्टी बनाते हैं तो भाजपा के लिए एक मुसीबत खड़ा होना लाज़मी है।
अखिलेश आज सपा में अलग थलग है और एक बेबस व बेचारे की भूमिका में है। सपा में अब चाचा व भतीजे का एक साथ रहना असम्भव है।शिवपाल आज अपनी संगठन में पकड़ की बात करते है और बाहरी लोग यह मानते भी है। लेकिन सच यह है कि अखिलेश के फ़ेस के बिना अब सपा सत्ता में वापसी नहीं कर सकती।
अखिलेश को यदि हीरो बनना है और अपनी अलग पहचान बनानी है तो यह सही समय है कि सपा व अपने दाग़ी परिवार को लात मारकर नयी पहचान बनाए .. नयी पार्टी बनायें…..और वे ऐसा ही करने जा रहे हैं।
मुलायम के बाद वैसे भी चाचा व मुलायम का नया परिवार अखिलेश को अलग कर ही देंगे। अच्छा है कि मुख्यमंत्री रहते अखिलेश स्वयं यह निर्णय ले लें।
ऐसा करने के लिए अखिलेश को इस्तीफ़ा देकर care taker मुख्यमंत्री बने रहने की ज़रूरत नहीं है। अपितु लोगों की सहानुभूति पाने के लिए मुलायम को अपने को बर्खास्त करने दें… जिससे माँ की मृत्यु के बाद सौतेली माँ द्वारा पदच्युत कराने …,घर से बाहर निकवाने व पिता द्वारा अनाथ छोड़ने से और भी सहानुभूति पैदा होगी। अखिलेश एक winner बनकर उभर सकते हैं।
इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री पद पर रहते पुरानी कांग्रेस के मठाधीशों को लात मारकर सफलता पूर्वक Congress(I) बनायी थी उसी तरह मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए अखिलेश को अब बदनाम दाग़ी परिवार से किनारा कर नयी पार्टी बनाना ही चाहिए …. सफल होने की पूरी सम्भावना है। यदि मुख्यमंत्री पद से चुनाव बाद हार कर या इस्तीफ़ा देकर पार्टी बनाते है तो सफल होने में शंका रहेगी क्यों कि सहानुभूति व त्याग की लहर जो अब मिल सकती है वह बाद में लुप्त हो जाएगी।
क्या हारकर जीतने वाला बाज़ीगर बनेगा टीपूँ या टीप-टाप करने वाला परजीवी टीपूँ ही बनकर रह जाएगा, यह तो वक़्त ही बताएगा।
नयी पार्टी सपा(अखिलेश) की घोषणा की प्रतीक्षा करें। यदि ऐसा होता है तो भाजपा के लिए ख़तरे की घंटी होगी।‘

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