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अखिलेश के इस मंत्री ने 4 साल में चौथी बार ली शपथ, दागी भी जरुरी भी

अखिलेश के इस मंत्री ने 4 साल में चौथी बार ली शपथ, दागी भी जरुरी भी

लखनऊ: यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने जिसे भ्रष्ट बताकर कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया एक बार फिर से अपने उस मंत्री को गले लगाना पड़ा। इनका नाम है गायत्री प्रजापति। 12 सितंबर को गायत्री प्रजापति को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया था। लेकिन अब एकबार फिर से कैबिनेट में उनकी वापसी हो गई है। वैसे गायत्री प्रजापति अखिलेश के वो मंत्री हैं जिनका मंत्रिमंडल से बाहर-भीतर आना जाना चलता रहता है। ये ऐसे मंत्री हीं जिन्होंने चार साल में चौथी बार मंत्रीपद की शपथ ली है।

प्रजापति की बर्खास्तगी की वजह बनी थी उनपर लगे आरोप और उनकी वापसी की वजह बनी है मुलायम सिंह यादव से उनकी करीबी। खनन मंत्री रहते हुए प्रजापति पर थोक के भाव में आरोप लगे थे। खनन घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। प्रजापति कभी भी नप सकते थे इसलिए अखिलेश ने उन्हें खुद से अलग कर दिया। लेकिन मुलायम को ये दूरी अखरने लगी प्रजापति के महाप्रताप को अखिलेश भले ही नहीं पहचान पाए हों लेकिन समाजवादी मुलायम उनके महाप्रताप को पहचानते हैं। इसलिए अपने सीएम बेटे को आदेश दे दिया कि प्रजापति की कैबिनेट में दोबारा वापसी हो।

प्रजापति की इस वापसी पर यूपी में खाट लेकर घूम रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी निशाना साधा है। राहुल ने कहा कि अगर दागी थे तो दोबारा मंत्री क्यों बना दिया। वो हर इंसान जो यूपी की राजनीति को पिछले कुछ दिनों से देख और पढ़ रहा है उन सभी को राहुल के इस सवाल के जवाब का इंतजार है। कि जिस प्रजापति के दाग पहले झक सफेद कुर्ता पहननेवाले अखिलेश को अखर रहे थे और उस दाग से पूरी पार्टी के मैली होने का डर सता रहा था प्रजापति के वो दाग इतने चमकीले कैसे निकल गए कि उन्हें दोबारा से उसी जगह पर बिठा दिया जहां से पहले बाहर किया था।

पिछले चार सालों में जिस तरह से प्रजापति की संपत्ति बढ़ी है उसे देखकर हर कोई हैरान है। उस नुस्खे की तलाश हर देश और हर सख्स कर रहा है जिससे महज चार सालों में प्रजापति की संपत्ति करोड़ से बढ़कर अरबों में पहुंच गई। 2012 में चुनाव आयोग के दिये हलफनामे में उनके पास 1 करोड़ 70 लाख की संपत्ति थी। लेकिन अब बताया जा रहा है उनकी संपत्ति एक हजार करोड़ हो गई है।

गायत्री प्रजापति के साथ साथ दो ब्राह्मण चेहरे को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। शिवकांत ओझा और मनोज पांडे को कैबिनेट में जगह दी गई है। इससे अखिलेश की एक और रणनीति सामने आती है कि इस चुनाव में अखिलेश ब्राह्मण चेहरों को अपनी तरफ करना चाहते हैं। इन्हीं ब्राह्मणों पर कांग्रेस भी दांव लगा रही है। इसकी वजह ये है कि यूपी में कुल 10-12 फीसदी ब्राह्मण आबादी हे। अगर ये वोटबैंक किसी एक पार्टी के पक्ष में चला जाए तो समझ लीजिये विरोधी देखते रहेंगे और खेल खत्म हो जाएगा।

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