अजमेर में ख्वाजा के दर से मौलवियों ने की मांग ‘देशभर में बीफ पर लगे प्रतिबंध’

नई दिल्ली: अजमेर शरीफ में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चल रहे उर्स के समापन के मौके पर मौलवियों ने एक सुर में सरकार से देशभर में गोमांस खाने, लाने ले जाने और इसका व्यापार करने पेर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी तरह के बीफ पर प्रतिबंध लगना चाहिए।

मौलवियों ने कहा इससे बेरोजगारी बढ़ेगी लेकिन अगर इसपर पूरी तरह से बैन लगा दिया जाता है तो हिंदू और मुसलमानों के बीच सौहार्द बना रहेगा।

सूफी मौलवियों ने कहा कि बीफ की वजह से देश में हिंदू और मुसलमानों के बीच सौहार्द का माहौल खराब होता है। अजमेर दरगाह के दीवान सैयद जैनुअल अबेदीन अली खान ने 12वीं शताब्दी से दरगाह पर आयोजित होनेवाले 805वें उर्स के समापन के मौके पर जारी बयान में बीफ पर बैन लगाने की मांग की है।

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सूफी मौलवियों ने इसे लेकर संयुक्त बयान भी जारी किया। जिसमें कहा गया है कि पीएम मोदी को करोड़ों मुसलमानों को राहत देते हुए इस मामले को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। सरकार को बीफ को बैन करने के लिए अध्यादेश पारित करना चाहिए। दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह के अलावा कर्नाटक के गुलबर्गा शरीफ, आंध्र प्रदेश के हलकट्टा शरीफ और नागौर, बरेली, कलियार, भागलपुर, जयपुर और फुलवारी जैसी दरगाह के मौलवियों ने भी इस मांग का समर्थन किया है।

दरअसल बीफ का मामला एक बार फिर तब जोर पकड़ा जब यूपी की योगी सरकार ने अवैध बूचड़खानों पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद झारखंड, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में भी अवैध बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाई शुरु कर दी गई। गुजरात में तो गोवंश की हत्या पर उम्रकैद की सजा वाला नया कानून पास कर दिया गया।

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अजमेर दरगाह के दीवान ने कहा हमारे हिंदू भाई गाय को मां मानते हैं। दूसरे धर्म के लोगों की भावनओं का सम्मान करना इस्लाम के मूल सिद्धांतों में से एक है। हम अपने हिंदू भाइयों से अपील करते हैं जबतक बीफ बैन की मांग को नहीं मान लिया जता है हमारे साथ खड़े हों।

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