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AAP के 21 विधायकों की सदस्यता खतरे में !

AAP के 21 विधायकों की सदस्यता खतरे में !

दिल्ली की KEJRIWAL सरकार को बड़ा झटका लगा है। क्योंकि राष्ट्रपति ने दिल्ली सरकार के संसदीय सचिव बिल को खारिज कर दिया है। जिसके बाद अब सबसे बड़ी मुसीबत उन 21 विधायकों पर आ गई है जिन्हें संसदीय सचिव बनाया गया था। बीजेपी और कांग्रेस दोनों संसदीय सचिवों की नियुक्ति का शुरु से ही विरोध करते रहे थे। दरअसल बीजेपी और कांग्रेस इसे ऑफिस ऑफ प्रॉफिट यानि लाभ का पद मान रहे थे। और इसीलिए इस नियुक्ति का विरोध भी कर रहे थे। लेकिन दूसरी तरफ केजरीवाल सरकार की दलील थी कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के तहत नहीं आता है। इसीलिए नियुक्ति मे कुछ गलत नहीं है।

  • राष्ट्रपति ने संसदीय सचिव बिल किया खारिज
  • AAP विधायकों की सदस्यता गई तो दिल्ली में होंगे उपचुनाव

लेकिन अब चुकी राष्ट्रपति ने दिल्ली सरकार के संसदीय सचिव बिल को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है इसलिए अब दिल्ली सरकार बैकफुट पर है और विपक्ष हमलावर। हलांकी 21 विधायकों की सदस्यता रद्द होगी या नहीं इस बारे में अभी कुछ भी कह पाना जल्दबाजी होगी। क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस ने चुनाव आयोग से भी इसकी शिकायत की थी। जहां मामला विचाराधीन है। चुनाव आयोग की तरफ से सभी 21 विधायकों को नोटिस भी जारी किया गया है। चुनाव आयोग सभी विधायकों से अपना पक्ष रखने को कह सकता है। उसके बाद चुनाव आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। अगर चुनाव आयोग भी राष्ट्रपति को सभी 21 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की सलाह देता है तो धारा 192 के तहत विधायकों की सदस्यता रद्द हो सकती है।

BJP और कांग्रेस का शुरु से तर्क रहा है कि 21 विधायकों को लाभ के पद के दायरे से बचाने के लिए ही दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी इस विधेयक को कानून बनाना चाहती थी।

aap-mla-listशरद कुमार, संजीव झा, सुखवीर सिंह, राजेश गुप्ता, सोम दत्त, अलका लांबा, शिव चरण गोयल, जरनैल सिंह(राजौरी गार्डन), जरनैल सिंह (तिलक नगर), राजेश ऋषि, आदर्श शास्त्री, कैलाश गहलोत, विजेंद्र गर्ग, प्रवीण कुमार, मदन लाल, नरेश यादव, अवतार सिंह, मनोज कुमार, नितिन त्यागी, अनिल कुमार बाजपेयी, सरिता सिंह।

अगर इन 21 विधायकों की सदस्यता रद्द होती है तो भी दिल्ली सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि 70 सदस्यों वाली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के पास 67 विधायक हैं। अगर 21 विधायक अयोग्य भी हो जाते हैं फिर भी सरकार के पास 46 विधायक होंगे। जबकि बहुमत के लिए 36 विधायकों की जरुरत होती है। लेकिन 21 विधायकों की अयोग्यता के बाद दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी की साख पर जरुर बट्टा लग जाएगा। अगर ये विधायक अयोग्य करार दिये जाते हैं तो इन सीटों पर दोबारा उपचुनाव होंगे। AAP के लिए बड़ी चुनौती इन सीटों को दोबारा जीतने की होगी।

विधायकों पर आए इस संकट के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्विट किया है कि मोदी काम नहीं करने दे रहे। राष्ट्रपति के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने आपात बैठक भी की। जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

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