शीतसत्र में LS में 21 दिन में केवल 19 घंटे और RS में 22 घंटे ही काम हुआ

नई दिल्ली: हाल में अनिश्चित काल के लिए स्थगित किये गए शीतकालीन सत्र में पिछले डेढ़ दशक में सबसे कम कामकाज हुआ। नोटबंदी पर हंगामे की वजह से लोकसभा में 85 फीसदी और राज्यसभा में 80 फीसदी वक्त बर्बाद हुआ। यानि पिछले 15 सालों में कामकाज के मामले में शीतसत्र का प्रदर्शन सबसे खराब रहा।

सरकार का अति महत्वपूर्ण जीएसटी बिल भी हंगामे की वजह से लोकसभा में नहीं आ सका। शीतसत्र में कुल 21 बैठकें हुई जिनमें से लोकसभा में 19 घंटे काम हुआ जबकि राज्यसभा में 22 घंटे काम हुआ। यानि लोकसभा में 91 घंटे 59 मिनट और राज्यसभा में 86 घंटे का वक्त बर्बाद हुआ।
जिस तरह से शीतसत्र में संसद का वक्त बर्बाद हुआ उसपर लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन और राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने अफसोस जाहिर किया। सुमित्रा महाजन ने कहा सेशन में व्यवधान की वजह से जो समय नष्ट हुआ वह हम सभी के लिए खासतौर पर मेरे लिए अच्छी बात नहीं है। इससे जनता में छवि धूमिल होती है।

दरअसल शीतकालीन सत्र के शुरुआत में ही ये अंदाजा लग गया था कि विपक्ष नोटबंदी पर सरकार के सामने कई प्रश्न लेकर खड़ा रहेगा। ये और बात है कि सरकार से प्रश्न पूछने को छोड़कर विपक्ष ने सारा काम किया। विपक्ष का हंगामा पहले दिन से आखिरी दिन तक बदस्तूर जारी रहा। राज्यसभा में नोटबंदी पर बहस शुरु तो हुई लेकिन पूरी बहस में प्रधानमंत्री के मौजूद रहने की मांग पर वो पूरी नहीं हुई। लोकसभा का भी यही नजारा था। सरकार अपनी बात कहने की कोशिश करती रही और विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर सदन में नहीं बोलने देने का आरोप लगाया तो पीएम मोदी ने एक जनसभा में कहा विपक्ष सदन में नहीं बोलने देता इसलिए जनसभा में बोलता हूं। बीजेपी के बयोवृद्ध नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने सदन न चलने पर विपक्ष और सरकार दोनों से नाराजगी जताई थी। वहीं राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी कहा कि सदन की कार्यवाही में सांसद भाग लें। राष्ट्रपति ने यहां तक कहा था कि संसद धरना देने के लिए नहीं है। लेकिन राष्ट्रपति की इस अपील का भी सांसदों पर असर नहीं हुआ। नतीजा ये हुआ कि पूरा शीत सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया।

हलांकी 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर 2010 में भी संसद में जोरदार हंगामा हुआ था। और पूरा शीतसत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया था। लेकिन उसका प्रदर्शन मौजूदा शीतसत्र से बेहतर रहा था।

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