2 अक्टूबर को झारखंड की जेलों में बंद 129 कैदी होंगे रिहा

रांची/झारखंड:  राज्य की अलग अलग जेलों में बंद 129 कैदियों को 2 अक्टूबर यानि महात्मा गांधी के जयंती के दिन रिहा किया जाएगा। इनमें 65 कैदी अनुसूचित जनजाति के हैं, 13 कैदी ऐसे हैं जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है। रिहा होने वाले कैदियों में दो महिला कैदी भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड मंत्रालय में राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक में मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी। सीएम ने कहा कि मानवता के नाते जेलों में बंद वैसे कैदी जिनका आचरण अच्छा है या उम्र ज्यादा हो गयी है, उन्हें छोड़ा जाये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज्यादा दिनों से जेल में शुचितापूर्ण जीवन जी रहे कैदियों को छोड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि जिन कैदियों को छोड़ने पर फैसला हो गया है, उन्हें अच्छा और नया जीवन  शुरू करने के लिए प्रेरित करें। उन्हें सुधरने का एक मौका दें।

रघुवर दास ने कहा कई बार आवेश में आकर कोई किसी घटना को अंजाम दे देता है। यदि जेल में सजा के दौरान उसे अपने अपराध का बोध है तथा उनका आचरण व्यवहार अच्छा हो गया है तो सजा का मूल उद्देश्य भी पूरा हो जाता है। ऐसे आचरण वाले 14 साल से ज्यादा समय तक जेलों में बंद कैदियों को प्राथमिकता दें। महात्मा गांधी के 150वीं जयंती वर्ष पर ऐसे कैदियों को छोड़ने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी जेलों में बंद ज्यादातर लोग गरीब व अशिक्षित हैं, जिन्हें बेल लेने या मुकदमा करने का पूरा ज्ञान नहीं है। झारखंड में आदिवासी, अनुसूचित जाति समाज के लोग अशिक्षा के कारण सजा पूरी होने के बाद भी जेलों में ही बंद है। कई तो ऐसे छोटे-छोटे जुर्म में बंद हैं, जिनकी सजा भी नहीं होती है। सजा होती भी है, तो उसकी कुल अवधि से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं। वैसे कैदियों की एक सूची बनाकर एक माह में सौंपे। सरकार अपना वकील देकर उन्हें रिहा करायेगी।

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