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रावन दहन के बाद क्यों शुरु होती है उसके अस्थियों की लूट ?

रावन दहन के बाद क्यों शुरु होती है उसके अस्थियों की लूट ?

दिल्ली: विजय दशमी पर देशभर में रावन दहन किया गया। कहीं रावन के पुतले का आकार काफी बड़ा था तो कहीं सामान्य आकार का रावन तैयार किया गया। शाम के वक्त हर जगह रावन का दहन हुआ। उसे देखने लिए हर रामलीला कमेटी में लोगों की भारी भीड़ जुटी। सभी इस रावन दहन को करीब से देखना चाहते थे।

लोगों के इस तरह से पुतले के काफी करीब पहुंचने की एक खास वजह भी है। दरअसल जब रावन का दहन किया जाता है तब लोग उसकी अस्थि लेने के लिए पुतले के काफी करीब पहुंच जाते हैं। रावन की अस्थियों के लिए लोग आपस में भी उलझ पड़ते हैं। जलते रावन के पुतले से उसकी अस्थियां निकालने की कोशिश में लोग घायल भी जाते हैं। यूपी के शाहजहांपुर में भी इस तरह से रावन की अस्थियां लेने की कोशिश में लोग घायल हो गए।

दरअसल इस तरह से रावन की अस्थियां घर ले जाने के पीछे एक धार्मिक मान्यता है। ये सर्वविदित है कि रावन महान पंडित था। उसने सूक्तों और संहिताओं की रचना की थी। मान्यता ये है कि उसकी सभी रचनाएं उसकी अस्थियों में समाहित रहती थीं। लोगों की मान्यता है कि रावन दहन के बाद उसकी अस्थियों को घर ले जाने से घर पर किसी तरह की मुसीबत नहीं आती है। बच्चों को किसी प्रकार का भय नहीं लगता है। भूत प्रेत का साया घर पर नहीं आता है। अक्सर लोग रावन की अस्थि को अपने घर के चौखट या चारपाई में लगाते हैं।

लेकिन लोगों का यही उत्साह और विश्वास जब अन्माद बन जाता है और जब लोग रावन के पुतले के काफी करीब पहुंच जाते हैं तो उसका नतीजा होता है हादसा । कई जगहों पर रावन के पुतले में आग लगाए जाने के बाद वहां इकट्ठी भीड़ उस जल रहे पुतले के काफी करीब पहुंच गई। रावन को करीब से जलते देखने और उसकी अस्थियां लेने के लिए लोगों ने उस चेतावनी को भी नजरअंदाज कर दिया जिसमें लोगों से पुतले से सुरक्षित दूरी बनाकर रखने को कही जा रही थी। और इसी अति उत्हास की स्थिति में कई जगह पर हादसे हो गए।

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