पूर्व CM हुड्डा के ठिकानों पर CBI छापेमारी क्यों ? ये है वजह

दिल्ली: CBI शनिवार को हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के 20 ठिकानों पर मानेसर जमीन घोटाले का सुराग ढूंढने पहुंची। सीबीआई की टीम रोहतक, चंडीगढ़, मानेसर, दिल्ली में हुड्डा के अलग अलग ठिकानों पर छेपामारी की शुरुआत की। CBI हुड्डा के साथ साथ तत्कालीन प्रधान सचिव छतर सिंह के अलावा वर्तमान आईएएस अधिकारी एसएस ढिल्लन के ठिकानों पर भी छापेमारी करने पहुंची। CBI किन सबूतों के आधार पर हुड्डा के ठिकान पर छापेमारी कर रही है आईये जानते हैं।
27 अगस्त 2004 से 24 अगस्त 2007 के दौरान बिल्डरों ने हरियाणा सरकार के अधिकारियों की मिलीभगत से मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला के किसानों से तकरीबन 400 एकड़ जमीन कौड़ी के भाव में खरीदी।
इसमें पहले हरियाणा सरकार गुड़गांव के मानेसर,नौरंगपुर और लखनौला में औद्योगिक मॉडल टाउनशिप बनाने के लिए 912 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की। लेकिन बिल्डरों ने किसानों को कम दाम पर अधिग्रहण का डर दिखाकर सस्ते दर पर जमीन हासिल कर ली।
बाद में उद्योग निदेशायल ने इस जमीन को 24 अगस्त 2007 को अधिग्रहण प्रक्रिया से बाहर कर दिया।
अधिग्रहण प्रक्रिया से बाहर करना सराकारी नीति का उल्लघंन है और इससे बिल्डरों को फायदा हुआ। क्योंकि बिल्डरों ने इसी अधिग्रहण का डर दिखाकर किसानों की जमीन सस्ती दर पर हासिल की थी।
CBI के एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि इस तरह से तकरीबन 400 एकड़ जमीन जिसका बाजार भाव उस वक्त प्रति एकड़ चार करोड़ यानि 400 एकड़ की कीमत 1600 करोड़ से ज्यादा थी उसे बिल्डरों ने महज 100 करोड़ में खरीद लिया।
इसकी वजह से गुरुग्राम के मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला में जमीन के मालिकों को 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
जिस वक्त इस गड़बड़ी का तानाबाना बुना जा रहा था तब हरियाणा के सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा थे। इसी सिलसिले में CBI ने 2015 में उनके खिलाफ केस दर्ज किया था। यही वो वजह है जिसके चलते सीबीआई ने हुड्डा के 20 ठिकानों पर छापेमारी की है।

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