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कलिखो पुल की जिंदगी से जुड़ी 10 बातें जानकार हैरान रह जाएंगे आप

कलिखो पुल की जिंदगी से जुड़ी 10 बातें जानकार हैरान रह जाएंगे आप

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल का शव उनके घर में ही पंखे से लटका मिला। वो महज 47 साल के थे। दुनिया ने भले ही उन्हें सीएम बनने के बाद जाना लेकिन उनकी पूरी जिंदगी संघर्ष में बीती। उनकी जिंदगी से जुड़ी ऐसी ही 10 बातों के बारे जानिये

  1. अरुणाचल प्रदेश के 8वें सीएम बने थे कलिखो पुल । कलिको का शाब्दिक अर्थ बेहतर कल होता है। वो कमान मिशमी जातीय समूह से आते थे जो भारत-चीन सीमा के दोनों तरफ पाया जाता है।
  2. कलिखो जब 5 साल के थे तो उनके पिता चल बसे फिर जब वो 13 साल के हुए तो उनके सिर से मां का साया उठ गया। वो अपनी चाची के घर रहते थे। जंगल से लकड़ी लाने पर उन्हें एक वक्त का खाना मिलता था।
  3. कलिखो ने बढ़ई का काम किया। जिसमें उन्हें डेढ़ रुपया रोजाना मिलता था। फिर उन्होंने रात में चौकीदारी शुरु कर दी जिसके बदले उन्हें 212 रुपये महीने का पगार मिलता था।
  4. स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही कलिखो ठेके पर छोटे मोटे काम करते थे। किसी तरह पैसे जोड़कर उन्होंने 9वीं क्लास में 4 सेकेंट हैंड ट्रक खरीदा। पुल ने इंदिरा गांधी गवर्नमेंट कॉलेज से बीए किया। स्नातक के तीसरे साल में उन्होंने 2.73 लाख रुपये में अपना घर बनाया।
  5. कलिखो पुल भगवान को नहीं मानते थे। उनका कहना था कि अगर भगवान होते तो उन्हें इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
  6. कलिखो जब कॉलेज में थे तो वो छात्र राजनीति में आए। बाद में कांग्रेस ने उन्हें विधानसभा का टिकट दिया।
  7. कलिखो 1995 के बाद से लगातार पांच बार विधायक चुने गए थे। अंजॉ जिले के हवाई से आने वाले कलिखो सीएम गेगांग अपांग के कार्यकाल (2003-2007) में वित्त मंत्री भी रहे थे। कलिखो मिश्मी समुदाय से ताल्लुक रखते थे। 1995 से 1997 तक वो वित्त उपमंत्री रहे। उसके बाद 1997-1999 तक बिजली राज्य मंत्री रहे। फिर 1999-2002 तक वित्त राज्य मंत्री और 2002 से 2003 तक भूमि प्रबंधन के राज्य मंत्री रहे। 2003-2005 तक कलिखो पुल ने वित्त मंत्रालय संभाला।
  8. कांग्रेस से बगावत कर उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी के समर्थन से सरकार बना ली। 19 फरवरी से 12 जुलाई तक वो अरुणाचल प्रदेश के सीएम रहे। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद 13 जुलाई को उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।
  9. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने लोगों से मिलना जुलना कम कर दिया था। ज्यादातर वक्त वो अकेले ही रहते थे।
  10. ईटानगर से विधायक पेची कासो उनकी कलिखो से काफी दिनों से मुलाकात नहीं हुई थी।
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